डेस्क : ए. रेवंत रेड्डी के एक बयान को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि यदि कभी गांधी परिवार को आर्थिक सहायता की आवश्यकता पड़ी तो तेलंगाना कांग्रेस के कार्यकर्ता “आसानी से 1000 करोड़ रुपये” जुटा सकते हैं। उनके इस कथन के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
रेवंत रेड्डी ने यह टिप्पणी कांग्रेस के एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की निष्ठा और संगठन की ताकत इतनी है कि बड़ी से बड़ी राशि भी जुटाई जा सकती है। उनके अनुसार, यह वक्तव्य पार्टी कार्यकर्ताओं की प्रतिबद्धता को दर्शाने के संदर्भ में दिया गया था।
भाजपा का पलटवार
भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर पहले संसाधनों की कमी की बात करते रहे हैं, जबकि अब इतने बड़े धन-संग्रह की बात कर रहे हैं।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि तेलंगाना में बुनियादी ढांचे और अन्य योजनाओं के लिए धन की आवश्यकता बताई जाती है, लेकिन अब गांधी परिवार के लिए धन जुटाने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य की प्राथमिकताएं क्या हैं।
भाजपा प्रवक्ताओं ने यह भी कहा कि प्रदेश के युवा भर्ती प्रक्रियाओं और किसान विभिन्न योजनाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य की वास्तविक जरूरतों से ध्यान भटकाने वाला है।
कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का वक्तव्य प्रतीकात्मक था और इसका सरकारी धन या राज्य संसाधनों से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं की एकजुटता और समर्थन को रेखांकित करने के लिए दिया गया बयान था।
राजनीतिक असर
रेवंत रेड्डी के इस बयान के बाद तेलंगाना की राजनीति में बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे परिवारवाद और प्राथमिकताओं के मुद्दे से जोड़ रहा है, जबकि कांग्रेस इसे संगठनात्मक शक्ति के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत कर रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।













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