डेस्क : पाकिस्तान ने दावा किया है कि भारत एक और युद्ध की तैयारी कर रहा है। यह दावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए किया। हालांकि उन्होंने साथ ही क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील भी की। भारत की ओर से फिलहाल इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्रपति जरदारी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय नेतृत्व युद्ध की तैयारी की बात कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में क्षेत्रीय शांति की वकालत की है और वह किसी भी प्रकार के संघर्ष के पक्षधर नहीं हैं। उन्होंने भारत के लिए संदेश देते हुए कहा कि युद्ध के बजाय वार्ता का मार्ग अपनाया जाना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता का यही एकमात्र टिकाऊ उपाय है।
जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया
अपने भाषण में राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के लोगों को राजनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा। उनके अनुसार, जब तक कश्मीरियों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक दक्षिण एशिया में स्थायी शांति संभव नहीं है।
सिंधु जल संधि पर आपत्ति
राष्ट्रपति ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने इसे “जल-आतंकवाद” करार देते हुए आरोप लगाया कि भारत जल प्रवाह को दबाव के साधन के रूप में प्रयोग कर रहा है। उनका कहना था कि जल संसाधनों का उपयोग राजनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
भाषण के दौरान हंगामा
राष्ट्रपति का यह संयुक्त सत्र में नौवां संबोधन था। भाषण के दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। सदन में ‘गो जरदारी गो’ और ‘खान को रिहा करो’ जैसे नारे लगाए गए, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था। इस कार्रवाई के तहत भारतीय सेना ने सीमा पार स्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच लगभग चार दिनों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक के अनुरोध पर संघर्षविराम की घोषणा की गई।
पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव उत्पन्न हो गया था। वर्तमान बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।













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