डेस्क : मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है और अब इस युद्ध ने एक नया मोड़ ले लिया है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम या अमेरिका के साथ किसी नई बातचीत के पक्ष में नहीं है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इस्लामिक गणराज्य न तो युद्धविराम की मांग कर रहा है और न ही अमेरिका के साथ बातचीत करने में उसकी कोई रुचि है। उन्होंने कहा, “हम युद्धविराम नहीं मांग रहे हैं। अमेरिका के साथ बातचीत का कोई कारण दिखाई नहीं देता। हमने पहले भी दो बार बातचीत की, लेकिन हर बार बातचीत के बीच में ही हम पर हमला कर दिया गया।”
रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में अराघची ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि यदि युद्ध लंबा चलता है तो सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
ईरान के हमले तेज, अमेरिकी ठिकानों को भी बनाया निशाना
इस बीच ईरान ने गुरुवार को इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों को तेज कर दिया। ईरानी मीडिया के अनुसार कुछ अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया गया।
ईरान ने हिंद महासागर में अपने युद्धपोत “आईरिस डेना” पर कथित अमेरिकी टॉरपीडो हमले की कड़ी निंदा की है। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है। विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि “अमेरिका को अपने किए पर बुरी तरह पछताना पड़ेगा।”
इजरायल ने भी तेज किए सैन्य हमले
दूसरी ओर इजरायल ने तेहरान और ईरान से जुड़े सैन्य ढांचे पर व्यापक हमले तेज करने की घोषणा की है। इजरायली सेना के अनुसार पिछले 24 घंटों में लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्ला के करीब 80 ठिकानों पर हमले किए गए हैं।
इजरायल ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स और अन्य सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इस दौरान तेल अवीव और यरूशलम में हवाई हमले के सायरन बजाए गए और मिसाइल हमलों की सूचना भी मिली।
ऐसे शुरू हुआ था युद्ध
गौरतलब है कि इस संघर्ष की शुरुआत पिछले शनिवार को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व, मिसाइल भंडार और उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकानों पर हमले किए थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन अभियानों में सेना के “शानदार प्रदर्शन” की सराहना की है। वहीं अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों ने युद्ध रोकने से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
बढ़ती जा रही है मानवीय और आर्थिक चिंता
अब तक इस संघर्ष में ईरान में 1000 से अधिक, लेबनान में 70 से ज्यादा और इजरायल में लगभग 12 लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं।
युद्ध के कारण वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है, अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्ग बाधित हुए हैं और पश्चिम एशिया में हजारों यात्री फंसे हुए हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने क्षेत्रीय सैन्य और आर्थिक ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है, जिसके बाद कई पड़ोसी देशों ने सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया है।













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