भोपाल : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में उस पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण (Maintenance) की मांग खारिज कर दी, जो खुद हर महीने करीब ₹1 लाख या उससे अधिक कमा रही थी। अदालत ने इस मांग को “पति से अनुचित रूप से वसूली की कोशिश” बताते हुए सख्त टिप्पणी की और कहा कि यह मामला “पाउंड ऑफ फ्लेश” (अनुचित लाभ लेने की प्रवृत्ति) जैसा प्रतीत होता है।
क्या था पूरा मामला?
पति-पत्नी की शादी नवंबर 2022 में हुई थी और जून 2023 से दोनों अलग रह रहे हैं। इसके बाद पति ने तलाक की याचिका दाखिल की।
इसी बीच पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण की मांग करते हुए अदालत में आवेदन दिया।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पत्नी की मासिक आय लगभग ₹1.25 लाख (या लगभग ₹20 लाख सालाना) है, जो पति की आय के बराबर या उसके आसपास है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पति-पत्नी की आय में कोई बड़ा अंतर नहीं है और न ही कोई आश्रित (बच्चा आदि) है, इसलिए पत्नी को भरण-पोषण देने का आधार नहीं बनता।
अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की याचिका को स्वीकार करना “पति से अनुचित लाभ लेने जैसा” होगा, जिसे न्यायालय स्वीकार नहीं कर सकता।
निचली अदालत का फैसला भी सही ठहराया
परिवार न्यायालय ने पहले ही पत्नी की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने उस फैसले को सही मानते हुए पत्नी की अपील भी खारिज कर दी।
कानूनी संदेश क्या है?
यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि भरण-पोषण केवल आर्थिक निर्भरता की स्थिति में ही दिया जाता है, न कि समान या स्वतंत्र आय होने पर।













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