जयपुर : आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ ने कहा कि जीवन में शिक्षा का महत्व तो है, लेकिन उससे भी अधिक मूल्यवान इंसानियत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब इंसानियत का अभाव हो जाता है, तो मानव जीवन का वास्तविक अर्थ ही समाप्त हो जाता है। ये विचार उन्होंने मंगलवार को निर्माण नगर स्थित स्थानीय विद्यालय के संबोधि परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
मुनि श्री ने करुणा को इंसानियत का सर्वोपरि गुण बताते हुए कहा कि करुणावान व्यक्ति का हृदय सदैव कोमल और संवेदनशील होता है। ऐसा व्यक्ति किसी भी प्राणी को पीड़ा में देखकर तुरंत द्रवित हो उठता है। उन्होंने कहा कि संवेदना का भाव ही करुणा की वास्तविक अभिव्यक्ति है, जो मानव को मानवता के उच्चतम स्तर तक ले जाता है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने परोपकार को इंसानियत की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि उत्तम मानव वही है, जिसके भीतर दूसरों के प्रति उपकार की भावना निरंतर प्रवाहित होती रहती है। परमार्थ की भावना ही व्यक्ति को महानता के मार्ग पर अग्रसर करती है और जीवन को सार्थक बनाती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर अजीत नाथ जी की स्तुति से किया गया। इसके पश्चात नमस्कार महामंत्र तथा “ॐ भिक्षु – जय भिक्षु” मंत्रों का सामूहिक जप अनुष्ठान संपन्न हुआ। उपस्थित साधकों को प्रेक्षाध्यान के प्रयोग भी कराए गए। अंत में मंगलपाठ के साथ धर्मसभा का समापन किया गया।













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