नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत एक बार फिर उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित इजाफे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से फिलहाल ईंधन की कीमतों में किसी तरह के तत्काल बदलाव के संकेत नहीं दिए गए हैं।
वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि, बढ़ती लागत के कारण तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ने की बात सामने आ रही है। जानकारों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों को लेकर नीति स्तर पर पुनर्विचार की स्थिति बन सकती है।
फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।













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