मुंबई : देश के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 22 आरोपियों को बरी करने के विशेष सीबीआई अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ ही करीब दो दशक से चल रहा यह बहुचर्चित मामला एक अहम कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
यह मामला वर्ष 2005 का है, जब गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ों में मौत होने का आरोप लगा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपी गई थी।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष सीबीआई अदालत ने दिसंबर 2018 में सभी 22 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए मृतक के परिजनों की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है, ऐसे में निचली अदालत के निर्णय में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
इस फैसले के बाद मामले में आरोपी रहे पुलिस अधिकारियों सहित सभी 22 लोगों को बड़ी राहत मिली है। यह मामला वर्षों तक देश की न्यायिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रहा, जिसमें पुलिस कार्रवाई और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे थे।
हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस कानूनी रूप से लगभग समाप्ति की ओर बढ़ गया है।













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