जयपुर : निर्माण नगर स्थित संबोधि सभागार में शुक्रवार को मदर्स डे के उपलक्ष्य में आयोजित धर्मसभा में माँ की महिमा पर विशेष प्रवचन हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री तत्व रुचि जी “तरुण” ने कहा कि संसार में यदि किसी स्वरूप को सबसे पवित्र, संवेदनशील और सहनशील कहा जा सकता है, तो वह माँ है। माँ केवल ममता की साकार प्रतिमा ही नहीं, बल्कि समता, त्याग और करुणा की अनुपम मिसाल भी है।
उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण सृष्टि ममता के भाव पर आधारित है और माँ उसी ममता का सर्वोच्च रूप है। चाहे धरती माँ हो या जन्म देने वाली माँ—दोनों ही असीम धैर्य, सहनशीलता और करुणा का प्रतीक हैं। माँ के भीतर संजोने, सँवारने और सहने की जो अद्भुत क्षमता होती है, वह अन्य किसी भी रूप में दुर्लभ है।
मुनि श्री ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे देश में भूमि को “भारत माता” और गौ को “गौ माता” कहकर सम्मान दिया जाता है। यह हमारी सांस्कृतिक चेतना में माँ के प्रति गहरी श्रद्धा और वंदना का प्रतीक है। भारतीय परंपरा में माँ केवल एक संबंध नहीं, बल्कि पूजनीय शक्ति का स्वरूप है। इसलिए “माँ” शब्द अपने आप में ही पूर्ण और विशिष्ट है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव कुमार जी ने कहा कि जीवन की हर कठिन परिस्थिति में सबसे पहले माँ का ही स्मरण होता है। माँ केवल संतान की रक्षक नहीं, बल्कि उसकी पोषक, प्रेरक और संकटमोचक भी होती है। उन्होंने कहा कि माँ सृजनशील, संवेदनशील और क्षमाशील होती है, और उसकी महिमा का पूर्ण वर्णन शब्दों में संभव नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि इतिहास में अनेक महापुरुषों ने अपनी माता का सम्मान कर समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत किया है।
कार्यक्रम के दौरान माँ की महिमा पर आधारित भजनों और सुमधुर गीतों की प्रस्तुति ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। धर्मसभा का प्रारम्भ तीर्थंकरों की स्तुति से हुआ तथा जप, ध्यान, तप और त्याग की साधनामयी भावना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













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