डेस्क : संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हाल के दिनों में हजारों पाकिस्तानी कामगारों को देश से निष्कासित (deport) किए जाने की कार्रवाई शुरू की है। यह कदम उस समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ताओं को लेकर क्षेत्रीय तनाव तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, यह निष्कासन केवल सामान्य आव्रजन (इमिग्रेशन) नियमों का मामला नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे बदलते भू-राजनीतिक हालात से भी जोड़ा जा रहा है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की कुछ कूटनीतिक गतिविधियाँ, जिनमें अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिशें शामिल हैं, इस घटनाक्रम से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हो सकती हैं।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यूएई में कई पाकिस्तानी श्रमिकों को अचानक वीज़ा रद्द होने और देश छोड़ने के आदेश मिलने की घटनाएँ सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि प्रभावित लोगों की संख्या हजारों में हो सकती है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि सीमित है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और कूटनीतिक वार्ताओं के बीच क्षेत्रीय देश अपनी रणनीतिक स्थिति को लेकर सतर्क हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों पर इस तरह की नीतिगत सख्ती का सीधा असर न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल यूएई या पाकिस्तान सरकार की ओर से इस बड़े पैमाने पर निष्कासन को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।













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