नई दिल्ली : देश में निजी निवेश में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2025 में भारत का निजी पूंजीगत व्यय 67 प्रतिशत बढ़कर 7.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था।
रिपोर्ट के अनुसार यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश चक्र के मजबूत पुनरुद्धार का संकेत है। उद्योग जगत में उत्पादन क्षमता विस्तार की गतिविधियां तेज हुई हैं और कई क्षेत्रों में नए निवेश प्रस्तावों में वृद्धि देखी गई है।
विनिर्माण क्षेत्र ने इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्षेत्र का योगदान कुल निवेश का लगभग आधा रहा, जिसमें इस्पात, ऑटोमोबाइल और रसायन उद्योग प्रमुख रहे। सेवा क्षेत्र ने भी उल्लेखनीय योगदान दिया है, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी, संचार और व्यापार सेवाओं में निवेश बढ़ा है।
सीआईआई के अनुसार देश में औद्योगिक क्षमता उपयोग बढ़कर लगभग 75 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो उद्योगों में मांग और उत्पादन वृद्धि का संकेत है। साथ ही बैंक ऋण प्रवाह में भी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे निजी क्षेत्र को विस्तार के लिए आवश्यक वित्तीय समर्थन मिल रहा है।
सीआईआई ने निवेश को और गति देने के लिए पांच सूत्रीय कार्य योजना भी प्रस्तुत की है। इसमें ऊर्जा कर प्रणाली में सुधार, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपाय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए 45 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना तथा डिजिटल और ऊर्जा अवसंरचना का विस्तार शामिल है।










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