डेस्क : रूस ने एक बार फिर भारत के उस रुख का समर्थन किया है जिसमें नई दिल्ली लगातार यह कहती रही है कि भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने स्पष्ट कहा कि भारत बाहरी दखल में रुचि नहीं रखता और मॉस्को इस नीति का सम्मान करता है।
रूसी समाचार मंच आरटी को दिए साक्षात्कार में लावरोव ने कहा कि भारत हमेशा से यह मानता आया है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान आपसी बातचीत से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रूस भारत के इस दृष्टिकोण को समझता है और उसका समर्थन करता है।
लावरोव ने कहा कि रूस दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है, लेकिन वह यह भी समझता है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा मामलों में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में हाल में हुए आतंकवादी हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।
रूस ने भारत को ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी भरोसा दिलाया है। लावरोव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, रूस भारत के साथ अपने ऊर्जा सहयोग को जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि तेल और गैस आपूर्ति से जुड़े समझौतों का पालन किया जाएगा और भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे समय में रूस का यह आश्वासन भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में शामिल रहा है और दोनों देशों के बीच तेल आयात को लेकर सहयोग लगातार बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह बयान केवल कूटनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकेत भी है।













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