नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में बड़े स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने से पहले केंद्रीय मंत्रियों के कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इसी समीक्षा के आधार पर आने वाले समय में मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए जा सकते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंत्रियों के मंत्रालयों में कार्य निष्पादन के साथ-साथ उनके संसदीय क्षेत्रों में सक्रियता, जनसंपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों में भागीदारी तथा केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी संगठन विभिन्न राज्यों से प्रतिवेदन एकत्र कर शीर्ष नेतृत्व को सौंप रहा है।
सूत्रों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों तथा क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल में नए चेहरों को अवसर दिया जा सकता है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार तथा दक्षिण भारत के कुछ राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां देकर सरकार में युवा नेताओं को स्थान दिया जा सकता है। वहीं, जिन मंत्रियों का प्रदर्शन अपेक्षानुसार नहीं माना गया है, उनके विभागों में परिवर्तन संभव है।
वर्तमान में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 72 मंत्री शामिल हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यह संख्या 81 तक हो सकती है। ऐसे में संभावित विस्तार के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध है।
हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार अथवा फेरबदल को लेकर केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।













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