डेस्क : अमेरिका ने एक बार फिर वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा करते हुए कहा कि आतंकवादी संगठन ISIS के वैश्विक नेटवर्क के दूसरे सबसे बड़े कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी को एक विशेष सैन्य अभियान में मार गिराया गया है। यह ऑपरेशन अमेरिका और नाइजीरिया की संयुक्त कार्रवाई के तहत अंजाम दिया गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि यह मिशन अत्यंत जटिल, संवेदनशील और लंबे समय तक चली खुफिया निगरानी का परिणाम था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां और सैन्य बल कई महीनों से अल-मिनुकी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। सटीक सूचना मिलने के बाद विशेष बलों ने संयुक्त अभियान चलाकर उसे समाप्त कर दिया।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अबू-बिलाल अल-मिनुकी को ISIS के वैश्विक ढांचे में अत्यंत प्रभावशाली और खतरनाक आतंकी माना जाता था। वह अफ्रीका में संगठन के विस्तार, भर्ती अभियान, वित्तीय नेटवर्क और कई आतंकी हमलों की रणनीति तैयार करने में शामिल था। अमेरिकी एजेंसियों ने उसे पहले ही “ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित कर रखा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्रवाई पश्चिमी अफ्रीका और साहेल क्षेत्र में की गई, जहां पिछले कुछ वर्षों में ISIS और अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठनों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ऑपरेशन का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अल-मिनुकी की मौत से ISIS के वैश्विक नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि दुनिया को अस्थिर करने की कोशिश करने वाले आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अमेरिका अपनी कार्रवाई जारी रखेगा। ट्रंप ने इस अभियान में शामिल अमेरिकी और नाइजीरियाई सैनिकों तथा खुफिया एजेंसियों की सराहना करते हुए इसे “आतंकवाद के खिलाफ बड़ी जीत” बताया।
अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि अफ्रीका अब आतंकवादी संगठनों के लिए नया केंद्र बनता जा रहा है। विशेष रूप से नाइजीरिया, माली, नाइजर और बुर्किना फासो जैसे देशों में चरमपंथी संगठनों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस क्षेत्र में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ISIS के शीर्ष नेतृत्व पर लगातार हो रहे हमलों से संगठन की संरचना कमजोर हुई है, लेकिन उसकी क्षेत्रीय शाखाएं अभी भी सक्रिय हैं। इसलिए इस कार्रवाई को बड़ी सफलता तो माना जा रहा है, लेकिन आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह समाप्त मानना जल्दबाजी होगी।













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