सियोल: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया तेजी से बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की बेहतर स्थिति में हैं।
सियोल में आयोजित भारत–कोरिया रक्षा उद्योग राउंडटेबल को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर के रक्षा औद्योगिक ढांचे में बड़े बदलाव हो रहे हैं, जिनका मुख्य कारण उभरती हुई तकनीकें हैं, जो युद्ध की प्रकृति को बदल रही हैं।
उन्होंने कहा, “दुनिया भर में रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से बदल रहा है। उभरती तकनीकें युद्ध के स्वरूप को पुनर्परिभाषित कर रही हैं। विनिर्माण अधिक तकनीक-आधारित होता जा रहा है। आपूर्ति श्रृंखलाएं पुनर्गठित हो रही हैं और नवाचार चक्र पहले से कहीं अधिक छोटे हो गए हैं।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में यह तकनीकी बदलाव मौजूदा भू-राजनीतिक परिवर्तनों का कारण भी है और परिणाम भी, ऐसे में तकनीकी रूप से सक्षम देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी का महत्व और बढ़ जाता है।
उन्होंने कहा, “ऐसे वातावरण में तकनीकी रूप से सक्षम देशों के बीच भरोसेमंद साझेदारी अत्यंत रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और दक्षिण कोरिया इस बदलते वैश्विक परिदृश्य में मिलकर काम करने की स्थिति में हैं।”
दक्षिण कोरिया की औद्योगिक क्षमता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश आज दुनिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, जहाज निर्माण, ऑटोमोबाइल, उन्नत बैटरियों, पेट्रोकेमिकल्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कोरिया के शिपयार्ड दुनिया के सबसे आधुनिक और कुशल शिपयार्डों में से एक हैं, जो उसकी तकनीकी और औद्योगिक शक्ति को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम में शामिल उद्योग जगत के नेताओं, नवोन्मेषकों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह मंच भारत और दक्षिण कोरिया के बीच साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।












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