स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय क्रिकेट में उभरते युवा बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन ने एक अहम और सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि आज के समय में युवा खिलाड़ियों पर “दूसरा सचिन तेंदुलकर” बनने का दबाव बनाना एक खतरनाक प्रवृत्ति है, जिसे रोकने की ज़रूरत है।
अश्विन ने स्पष्ट किया कि हर खिलाड़ी अपनी अलग पहचान लेकर आता है और उसे किसी महान खिलाड़ी की छाया में देखने की बजाय उसकी व्यक्तिगत प्रतिभा के आधार पर आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की तुलना न केवल अनुचित है, बल्कि यह युवा खिलाड़ियों के मानसिक विकास पर भी असर डाल सकती है।
इस पूरे मुद्दे की पृष्ठभूमि में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन रहा है, जिन्होंने घरेलू और आईपीएल स्तर पर अपने आक्रामक खेल से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा है। उनकी तुलना कई बार महान बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर से की जा रही है, जो लगातार बहस का विषय बनी हुई है।
अश्विन ने एक बातचीत के दौरान कहा कि जब युवा खिलाड़ी भावनात्मक या आक्रामक स्थिति में प्रतिक्रिया देते हैं, तो उसे अतिरंजित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि हर खिलाड़ी कभी न कभी बच्चा रहा है, और उसी नजरिए से उन्हें समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि क्रिकेट में आज की मीडिया और सोशल मीडिया की तेज़ी ने खिलाड़ियों के ऊपर पहले से कहीं अधिक दबाव बना दिया है। इसलिए किसी भी युवा को “दूसरा सचिन” कहकर एक तय फ्रेम में बांधना सही नहीं है।
इसी बीच वैभव सूर्यवंशी के नाम को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं, जिन्हें भारतीय क्रिकेट का उभरता हुआ सितारा माना जा रहा है। कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ भी इस बात पर सहमत दिखे हैं कि उन्हें अपने प्राकृतिक खेल के साथ आगे बढ़ने देना चाहिए, बिना किसी भारी तुलना के बोझ के।
इस मुद्दे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की पहचान अब उम्मीदों के दबाव में दबती जा रही है, या फिर नई पीढ़ी को अपनी राह खुद तय करने दी जाएगी।












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