नई दिल्ली : भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरण किए जाने से राजकोषीय स्थिति को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट के चलते सब्सिडी व्यय पर बढ़ते दबाव के बीच यह अतिरिक्त गैर-कर राजस्व सरकार के लिए सहायक साबित हो सकता है, साथ ही बैंकिंग प्रणाली में तरलता भी बढ़ेगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को घोषणा की कि इस वर्ष सरकार को दिया जाने वाला लाभांश पिछले वर्ष के 2.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि यह बढ़ा हुआ अधिशेष हस्तांतरण सरकार को सब्सिडी खर्चों के कुछ हिस्से को संतुलित करने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न, उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी पर संभावित अतिरिक्त भार को यह आंशिक रूप से कम कर सकता है।
श्रीवास्तव के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रिज़र्व बैंक की कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सकल आय में 26.4 प्रतिशत और शुद्ध आय में 26.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती सोने की कीमतों के बीच भारतीय रिज़र्व बैंक लगातार अपने स्वर्ण भंडार का अनुपात बढ़ा रहा है। वर्ष 2020-21 में स्वर्ण भंडार की हिस्सेदारी 5.9 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2025-26 में 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा कि यह लाभांश बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप है, लेकिन इससे राजकोषीय दबाव की चिंताएं पूरी तरह कम नहीं होंगी। उनके अनुसार, बढ़ते जोखिमों के बीच बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है।
एमके ग्लोबल की रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनावों के कारण ऊर्जा और उर्वरक सब्सिडी पर सरकारी व्यय बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार इस संकट से लगभग 1.7 से 1.8 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का लगभग 0.5 प्रतिशत) का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जबकि उर्वरक सब्सिडी में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये (जीडीपी का 0.3 प्रतिशत) का और दबाव संभव है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक से प्राप्त लाभांश से बैंकिंग प्रणाली में तरलता की स्थिति में सुधार होगा और कोर लिक्विडिटी सरप्लस बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि यह अतिरिक्त हस्तांतरण सरकार को वित्तीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रखने में मदद करेगा, भले ही वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहें। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय बैंक द्वारा अधिक राशि आरक्षित कोष में रखने से भविष्य में वित्तीय बाजारों में हस्तक्षेप करने की क्षमता मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरण सरकार को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अतिरिक्त वित्तीय लचीलापन प्रदान करता है, हालांकि सब्सिडी और राजकोषीय दबाव से जुड़ी चुनौतियां बनी रहने की संभावना है।













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