नई दिल्ली: अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी करने के बाद स्थायी किए जाने को लेकर बड़ा बदलाव संभव है। रिपोर्ट के अनुसार, तीनों सेनाएं मौजूदा 25 प्रतिशत कोटे से अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रस्ताव दे रही हैं। इसके साथ ही भविष्य में भर्ती और कोटे दोनों बढ़ाने की भी तैयारी चल रही है।
जानकारी के अनुसार, नौसेना ने सबसे अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी रखने की मांग की है, जबकि थल सेना और वायुसेना ने भी इसे 25 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत तक करने का सुझाव दिया है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी सरकार स्तर पर लंबित है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत अग्निपथ योजना में चयनित युवाओं को चार साल की सेवा दी जाती है, जिसके बाद केवल एक निर्धारित प्रतिशत (25%) को मेरिट के आधार पर स्थायी किया जाता है और बाकी जवानों को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आने वाले समय में सेना में भर्ती संख्या बढ़ाई जा सकती है। अनुमान है कि वार्षिक वैकेंसी को बढ़ाकर लगभग 90 हजार तक किया जा सकता है, ताकि बलों में जवानों की कमी को पूरा किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव सेना में अधिक अनुभवी जवानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और परिचालन क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।













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