‘मुझे 13 दिसंबर, 2023 मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण का दिन स्पष्ट याद है। मैंने प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व का मुख्यमंत्री के रूप में स्वागत किया और जैसे ही मोहन यादव ने शपथ ली, स्वाभाविक रूप से सबका ध्यान उन पर चला गया। बाद में प्रधानमंत्री मेरे पास आए और धीरे से कहा- शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी हैं। इसके छह महीने बाद नौ जून, 2024 को मैंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मुझे कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया। तब मुझे अहसास हुआ प्रधानमंत्री ने उस शपथग्रहण समारोह के दौरान ही मेरे लिए योजना बना ली थी।’
यह अंश है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कई संस्मरणों को शामिल किया है। पुस्तक में शिवराज सिंह के प्रधानमंत्री मोदी के साथ तीन दशकों से अधिक पुराने आत्मीय संबंधों का हृदयस्पर्शी वर्णन है। इसमें घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि अनुभवों की वह यात्रा है, जो 1991-92 की एकता यात्रा से प्रारंभ होकर वर्ष 2025 में उनके तीसरे कार्यकाल तक विस्तृत है।
पुस्तक में और क्या
शिवराज सिंह ने पुस्तक में कहा है कि पहलगाम हमले के बाद कैबिनेट बैठक के बाद उनके मन में पुस्तक लिखने का विचार आया। तब प्रधानमंत्री सऊदी अरब के राजकीय दौरे पर थे। लेकिन सूचना मिलने पर वह कार्यक्रम को बीच में ही रोककर अगले दिन भारत लौट आए।
उन्होंने लिखा, ‘30 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट बैठक के वातावरण में तनाव था, और मेरे मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था-इन कठिन क्षणों का बोझ मोदीजी पर कितना भारी पड़ रहा होगा? लेकिन मैंने उन्हें अंदाज में कमरे में आते देखा। उनके मन-मानस पर क्रोध और विचलन का नामोनिशान नहीं था। अपनी शांत, परंतु दृढ़निश्चयी आवाज में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। सर्जिकल स्ट्राइक्स और एयरस्ट्राइक्स से अलग होगा। जिन्होंने यह हरकत करने की जुर्रत की है, वे दुनिया के किसी भी कोने में छुपे हों, हम उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।’ ये क्रोध में बोले गए शब्द नहीं, बल्कि अडिग संकल्प और दृढ़ नेतृत्व के परिचायक थे।
जब शिवराज सिंह चौहान को लिस्ट में नहीं मिला उनका नाम
पीटीआई भाषा ने किताब में वर्णित अंशों के हवाले से लिखा, जब भाजपा ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो चौहान ने सोचा कि पहले उन सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जहां भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही थी। उन्होंने लिखा, ‘मेरा नाम शुरुआती सूचियों में शामिल नहीं था।’
पुराने बयान का जिक्र
किताब के अनुसार, इसी दौरान एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य में विकास का उल्लेख करते हुए कहा था, ‘अगर हम नहीं रहे, तो हमें बहुत याद किया जाएगा।’ उन्होंने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है।













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