डेस्क : राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी-यूजी 2026) में कुछ परीक्षा केंद्रों पर हुई बाधा की पुष्टि के बाद देश की परीक्षा प्रणाली को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए।
एनटीए ने स्पष्ट किया कि 30 मई को कुछ परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी खराबी के कारण परीक्षा समय पर शुरू नहीं हो सकी। यह समस्या सेवा प्रदाता कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की ओर से आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई।
कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि जो सरकार “विश्व गुरु” होने का दावा करती है, वह देश में एक परीक्षा भी ठीक से नहीं करा पा रही है। उन्होंने कहा कि “नीट, सीबीएसई, एसएससी और अब सीयूईटी—चार बड़ी परीक्षाएं, एक करोड़ से अधिक छात्र, और किसी भी परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शिता के साथ नहीं कराया जा सका।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है और कहा कि “जिस पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है, वही भविष्य में जवाब मांगेगी।”
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि देश को एक “शिक्षित प्रधानमंत्री” की आवश्यकता है। यह टिप्पणी एएपी नेता आतिशी द्वारा वाराणसी के एक परीक्षा केंद्र में छात्रों को हुई परेशानी को लेकर की गई पोस्ट के जवाब में आई।
वहीं, एनटीए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि तकनीकी समस्या के कारण कुछ केंद्रों पर परीक्षा में देरी हुई, जिसे बाद में ठीक कर लिया गया। एजेंसी ने बताया कि प्रभावित छात्रों को पूर्ण अतिरिक्त समय दिया गया ताकि किसी भी उम्मीदवार को नुकसान न हो।
एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया कि सुबह की पाली के अभ्यर्थियों को पूरी अवधि दी गई और उन्हें परीक्षा समाप्त होने के बाद ही जाने दिया गया। संस्था ने असुविधा के लिए खेद जताते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही।
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पहले से ही सीबीएसई की ओएसएम विसंगतियों और नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर देश में राजनीतिक बहस जारी है और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।













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