डेस्क :विवाह के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों को लेकर पति-पत्नी के बीच शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि मामला तलाक तक पहुंच गया। हालांकि परिवार परामर्श केंद्र की पहल से दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और वैवाहिक संबंध टूटने से बच गए।
जानकारी के अनुसार, विवाह के बाद पत्नी का कहना था कि वह परिवार की परंपरा के अनुसार घूंघट करेगी, लेकिन इसके बदले पति को भी पारंपरिक पहनावा अपनाना चाहिए। पत्नी की शर्त थी कि यदि वह घूंघट में रहेगी तो पति को भी सार्वजनिक रूप से शेरवानी या पारंपरिक वेशभूषा पहननी चाहिए। इस बात को लेकर दोनों के बीच लगातार विवाद होने लगा।
समय के साथ मतभेद गहराते गए और दंपती के रिश्ते में तनाव बढ़ गया। स्थिति ऐसी हो गई कि मामला परिवार परामर्श केंद्र तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं, जिसके बाद परामर्शदाताओं ने उनसे बातचीत कर समझौते का प्रयास किया।
कई दौर की काउंसिलिंग के बाद पति-पत्नी ने एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने पर सहमति जताई। दोनों ने पारिवारिक जीवन को आगे बढ़ाने और छोटे-छोटे मतभेदों को बातचीत से सुलझाने का निर्णय लिया। इसके बाद मामला सुलझ गया और तलाक की नौबत टल गई।
परिवार परामर्श केंद्र के अधिकारियों का कहना है कि वैवाहिक जीवन में संवाद की कमी अक्सर छोटे विवादों को बड़ा बना देती है। समय रहते बातचीत और समझदारी से कई रिश्तों को टूटने से बचाया जा सकता है।













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