कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उनके साथ रणनीति और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में अपेक्षित संख्या में जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में केवल छह सांसद और आठ विधायक ही शामिल हुए, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाओं को और बल मिला।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। पार्टी के कई नेता और विधायक अलग रुख अपनाते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में कम उपस्थिति वाली यह बैठक ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक दृष्टि से चिंता का विषय मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ा है। हाल के सप्ताहों में कई विधायकों और नेताओं के बागी तेवर सामने आए हैं, जबकि कुछ नेताओं ने पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन की मांग भी उठाई है।
उधर, पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक बैठक में कम उपस्थिति को लेकर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि टीएमसी का कहना है कि पार्टी एकजुट है और संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी ओर विपक्ष इस घटनाक्रम को ममता बनर्जी के घटते प्रभाव और पार्टी में बढ़ती असहमति का संकेत बता रहा है।













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