डेस्क: देश की सबसे बड़ी एसेट मैनेजमेंट कंपनियों में शामिल एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से अपने प्रस्तावित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए मंजूरी मिल गई है। इस मंजूरी के साथ कंपनी के बहुप्रतीक्षित शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का रास्ता साफ हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह आईपीओ करीब 13,000 करोड़ रुपये का हो सकता है और इसे भारतीय बाजार के सबसे बड़े म्यूचुअल फंड क्षेत्र के सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। कंपनी ने इससे पहले मार्च 2026 में सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल किया था, जिस पर अब नियामक की अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है।
प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के रूप में होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक—भारतीय स्टेट बैंक और फ्रांसीसी साझेदार अमुंडी—अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इस प्रक्रिया में कंपनी को कोई प्रत्यक्ष पूंजी प्राप्त नहीं होगी।
जानकारों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक अपनी हिस्सेदारी का लगभग 6.3 प्रतिशत और अमुंडी करीब 3.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकते हैं। कुल मिलाकर लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में पेश किए जाने की संभावना है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस आईपीओ से न केवल एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की ब्रांड वैल्यू और पारदर्शिता में वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार में म्यूचुअल फंड उद्योग की हिस्सेदारी भी और मजबूत होगी। यह कदम भारतीय वित्तीय क्षेत्र में सूचीबद्धता की दिशा में एक बड़ा विकास माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, आईपीओ की लिस्टिंग की प्रक्रिया आगामी महीनों में पूरी की जा सकती है, हालांकि अंतिम तारीख और प्राइस बैंड अभी घोषित नहीं किया गया है।













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