डेस्क : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विशेष जांच दल (SIT) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तंज कसा कि जांच एजेंसी को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कहीं जांच रिपोर्ट ही चोरी न हो जाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को किसी भी प्रकार से प्रभावित करने का प्रयास नहीं होना चाहिए तथा पूरे मामले की वास्तविकता जनता के सामने लाई जानी चाहिए। सपा प्रमुख ने कहा कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना आवश्यक है।
गौरतलब है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। जांच दल वित्तीय लेनदेन, मंदिर प्रशासन और संबंधित व्यवस्थाओं की पड़ताल कर रहा है।
समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रही है। अखिलेश यादव इससे पहले भी कह चुके हैं कि यदि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में कठिनाई हो रही है तो जांच का दायरा और व्यापक किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT जांच पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और सत्य जल्द सामने आएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा तथा लोगों को जांच पूरी होने तक अनावश्यक अटकलों से बचना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण अब केवल प्रशासनिक या वित्तीय जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विपक्ष जहां जांच की पारदर्शिता को मुद्दा बना रहा है, वहीं सरकार निष्पक्ष कार्रवाई और जवाबदेही का भरोसा दिला रही है। ऐसे में सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।













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