डेस्क : महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विपक्षी रणनीति तय करने के लिए आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गठबंधन की मजबूती पर खुलकर चिंता जताई।
बताया जा रहा है कि महाविकास अघाड़ी की बैठक में करीब 23 विधायक अनुपस्थित रहे। बैठक का उद्देश्य विधानसभा के भीतर सरकार को घेरने के लिए साझा रणनीति तैयार करना था, लेकिन प्रमुख नेताओं और विधायकों की गैरमौजूदगी ने विपक्षी खेमे के भीतर समन्वय को लेकर सवाल खड़े कर दिए। इसी दौरान उद्धव ठाकरे ने कथित तौर पर पूछा कि क्या गठबंधन के सभी घटक दल वास्तव में एकजुट हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा राजनीतिक झटका लगा था। उनके गुट के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना खेमे में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद से ही ठाकरे गुट की राजनीतिक स्थिति और संगठनात्मक मजबूती को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने भी राजनीतिक अटकलों को हवा दी। हालांकि सहयोगी दलों की ओर से इन अनुपस्थितियों के पीछे व्यक्तिगत और पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला दिया गया है।
इस बीच शरद पवार ने गठबंधन की मजबूती पर भरोसा जताते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी में किसी बड़े टूट की संभावना नहीं है और उनके सांसद पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। इसके बावजूद विपक्षी गठबंधन के भीतर तालमेल और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल महाविकास अघाड़ी के टूटने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मतभेद, नेताओं की अनुपस्थिति और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम गठबंधन की आंतरिक चुनौतियों को जरूर उजागर कर रहे हैं। आगामी चुनावी मुकाबलों और विधानसभा की राजनीतिक लड़ाइयों से पहले विपक्ष के लिए एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।













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