डिस्क : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कच्चा तेल अब लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है, जो हाल के महीनों की तुलना में काफी नरम स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति में सुधार, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और मांग में हल्की सुस्ती के चलते तेल की कीमतों में यह गिरावट देखने को मिल रही है। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए राहत की स्थिति बन सकती है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत नहीं घटते क्योंकि आयातित कच्चे तेल की आपूर्ति, रिफाइनिंग और वितरण प्रक्रिया में समय लगता है।
इसके अलावा, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि तेल विपणन कंपनियां पहले अपने पुराने महंगे क्रूड के स्टॉक का उपयोग करती हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं तक सस्ता तेल पहुंचने में कुछ सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है।
सरकारी रुख और टैक्स संरचना भी ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक तुरंत नहीं पहुंच पाता।
हालांकि, मौजूदा रुझान को देखते हुए अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल के दामों में राहत मिल सकती है।













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