टोक्यो: पृथ्वी को भविष्य में संभावित क्षुद्रग्रहों के खतरे से बचाने की दिशा में जापान ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा (जेएएक्सए) के अंतरिक्ष यान हायाबुसा-2 ने रविवार को पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रह टोरिफुने के बेहद करीब से सफल उड़ान भरते हुए एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी परीक्षण पूरा किया।
जेएएक्सए के अनुसार, फ्रिज के आकार का यह अंतरिक्ष यान लगभग 800 मीटर की दूरी से टोरिफुने के पास से गुजरा। इस दौरान इसकी गति 18,000 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक थी। यह मिशन किसी क्षुद्रग्रह से टकराने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर किसी खतरनाक क्षुद्रग्रह की दिशा बदलने के लिए अंतरिक्ष यान को अत्यंत सटीकता से नियंत्रित करने की क्षमता का परीक्षण करने के उद्देश्य से संचालित किया गया।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि फ्लाईबाई सफल रही और हायाबुसा-2 सामान्य रूप से कार्य कर रहा है। मिशन कंट्रोल सेंटर में वैज्ञानिकों ने सफलता की पुष्टि होते ही तालियां बजाकर इस उपलब्धि का स्वागत किया।
यदि यह पुष्टि होती है कि अंतरिक्ष यान वास्तव में 800 मीटर की दूरी तक पहुंचा, तो यह किसी पृथ्वी-निकट क्षुद्रग्रह के सबसे निकट किए गए अभियानों में से एक होगा। जेएएक्सए के वैज्ञानिकों ने इस मिशन की सटीकता की तुलना जापान के दक्षिणी छोर ओकिनावा से उत्तरी द्वीप होक्काइडो तक फैले क्षेत्र में एक छोटे सिक्के के बीच से निशाना लगाने जैसी चुनौती से की।
फ्लाईबाई के दौरान हायाबुसा-2 के कैमरों ने क्षुद्रग्रह की सतह की तस्वीरें और वैज्ञानिक आंकड़े भी एकत्र किए। इनमें उसकी भौगोलिक संरचना, सतह की बनावट और तापमान शामिल हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में यदि किसी क्षुद्रग्रह को पृथ्वी से दूर धकेलने का प्रयास किया जाता है, तो उसकी सतह चट्टानी है, मलबेनुमा है या रेतीली—यह जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी के आधार पर उसकी प्रतिक्रिया तय होगी।
यह मिशन किसी तत्काल अंतरिक्षीय खतरे के कारण नहीं, बल्कि ग्रह रक्षा (प्लैनेटरी डिफेंस) तकनीक को विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है।
वर्ष 2014 में प्रक्षेपित हायाबुसा-2 पहले भी क्षुद्रग्रह रयुगु पर सफलतापूर्वक उतरकर वहां से नमूने एकत्र कर पृथ्वी पर ला चुका है। इन नमूनों ने वैज्ञानिकों को लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले सौर मंडल के निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं।
अब हायाबुसा-2 का अगला लक्ष्य वर्ष 2031 में क्षुद्रग्रह 1998 केवाई26 के साथ रेंडेज़वू (निकट पहुंचकर विस्तृत अध्ययन) करना है। इस मिशन से क्षुद्रग्रहों के बारे में और अधिक जानकारी मिलने के साथ-साथ पृथ्वी की ग्रह रक्षा संबंधी तकनीकों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।













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