हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आने वाली दो एकादशियों सहित वर्षभर में कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं। प्रत्येक एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और श्रद्धापूर्वक किए गए इस व्रत को आध्यात्मिक उन्नति, पापों से मुक्ति तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है।
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली योगिनी एकादशी विशेष रूप से पुण्यदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से जीवन के जाने-अनजाने में हुए पापों का क्षय होता है। साथ ही साधक को सुख, शांति, समृद्धि और भगवान श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। इस वर्ष योगिनी एकादशी पर कई शुभ एवं कल्याणकारी योगों का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
योगिनी एकादशी व्रत कब रखा जाएगा?
ज्योतिषाचार्य धर्मेंद्र झा के अनुसार, पंचांग के मुताबिक आषाढ़ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 9 जुलाई 2026 को दोपहर 3:45 बजे होगा और इसका समापन 10 जुलाई 2026 को दोपहर 1:20 बजे होगा।
चूंकि एकादशी तिथि उदयातिथि में 10 जुलाई को विद्यमान रहेगी, इसलिए योगिनी एकादशी का व्रत शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को रखा जाएगा।
योगिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में योगिनी एकादशी को अत्यंत प्रभावशाली व्रत बताया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति अपने जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और अंततः साधक को मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह व्रत केवल सांसारिक सुख-समृद्धि ही नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का भी प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष बन रहे हैं कई शुभ संयोग
योगिनी एकादशी 2026 पर कई मंगलकारी योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन सुकर्मा योग और धृति योग का शुभ संयोग रहेगा। साथ ही, एकादशी का व्रत शुक्रवार को पड़ने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त होने का विशेष अवसर माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी-नारायण का पूजन, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्रीहरि के मंत्रों का जप तथा दान-पुण्य करने से धन-धान्य, वैभव और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। यह संयोग जीवन में समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति दोनों का मार्ग प्रशस्त करता है।
व्रत पारण का शुभ समय
एकादशी व्रत का पारण 11 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा। पारण का शुभ समय प्रातः 5:32 बजे से 8:15 बजे तक रहेगा।
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना अनिवार्य माना गया है। निर्धारित समय में विधिपूर्वक पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है, जबकि द्वादशी तिथि बीत जाने के बाद पारण करना शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है।
योगिनी एकादशी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भगवान विष्णु के प्रति अटूट श्रद्धा का उत्सव है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इसलिए इस पावन अवसर पर भगवान श्रीहरि का स्मरण, पूजा, जप, दान और सत्कर्म विशेष फलदायी माने गए हैं।













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