डेस्क : आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ ही करदाताओं के बीच समय सीमा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सामान्य तौर पर व्यक्तिगत करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में करदाताओं को बाद में भी रिटर्न दाखिल करने का अवसर मिल सकता है।
आयकर नियमों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति तय समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है तो वह बिलेटेड रिटर्न (देरी से दाखिल किया गया रिटर्न) जमा कर सकता है। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होता है और देरी के आधार पर शुल्क भी देना पड़ सकता है।
कर विशेषज्ञों के मुताबिक, कई बार तकनीकी समस्या, गंभीर स्वास्थ्य कारण, प्राकृतिक आपदा, जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध न होना या अन्य वास्तविक परेशानियां रिटर्न दाखिल करने में देरी का कारण बन सकती हैं। ऐसे मामलों में करदाता अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं, लेकिन राहत देना आयकर विभाग के नियमों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
आयकर विभाग आमतौर पर करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने की सलाह देता है, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके। अंतिम तारीख के बाद रिटर्न दाखिल करने पर लेट फीस लग सकती है और कुछ मामलों में कर लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि करदाताओं को अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय पहले ही अपने जरूरी दस्तावेज तैयार कर लेने चाहिए। फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश से जुड़े दस्तावेज और अन्य आय संबंधी जानकारी समय पर जुटाने से रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
वहीं, जिन करदाताओं को रिफंड मिलना है, उनके लिए समय पर ITR दाखिल करना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि देरी से रिटर्न दाखिल करने पर रिफंड प्रक्रिया में भी विलंब हो सकता है।













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