जयपुर : मालवीय नगर स्थित सेक्टर-9 की एस.एफ.एस. कॉलोनी में मंगलवार को “हिंसा बनाम अहिंसा, भोग बनाम त्याग” विषय पर एक आध्यात्मिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रवचनकार संत मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’ के सान्निध्य में धर्म, अहिंसा और आत्मकल्याण पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया गया।
अपने उद्बोधन में मुनिश्री तत्त्व रुचि जी ने कहा कि हिंसा के माध्यम से धर्म की स्थापना करना भगवान महावीर के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है। उन्होंने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि “मारना हिंसा है और नहीं मारना अहिंसा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को बचाने के प्रयास में भी यदि राग, द्वेष या हिंसा का भाव जुड़ जाए तो वह निर्विवाद अहिंसा नहीं कही जा सकती। इसलिए अहिंसा का वास्तविक और निर्विवाद स्वरूप केवल ‘नहीं मारना’ है। उन्होंने कहा कि राग, द्वेष, मोह और ममता ही कर्म बंधन के प्रमुख कारण हैं।
मुनिश्री ने आचार्य भिक्षु द्वारा प्रतिपादित धर्म की संक्षिप्त परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि “त्याग धर्म है और भोग अधर्म। व्रत धर्म है तथा अव्रत अधर्म।” उन्होंने कहा कि त्याग आत्मा को मुक्ति की ओर ले जाता है, जबकि भोग मनुष्य को बंधनों में जकड़ता है। संसार और आत्मशुद्धि के मार्ग अलग-अलग हैं तथा दोनों को एक मान लेने से दोनों की सार्थकता समाप्त हो जाती है।
इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने कहा कि आत्मविकास के लिए सम्यक दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। सम्यक्त्व प्राप्त जीव को चाहे अनेक जन्म-मरण का चक्र क्यों न भोगना पड़े, अंततः वह मोक्ष को अवश्य प्राप्त करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर भगवान महावीर की स्तुति से हुआ। संगोष्ठी में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
आयोजकों ने बताया कि बुधवार प्रातः 6:15 बजे मुनि द्वय सेक्टर-9 स्थित एस.एफ.एस. कॉलोनी से विहार कर मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र के लिए प्रस्थान करेंगे। मंगलवार प्रातः वे वसुंधरा कॉलोनी से विहार कर सेक्टर-9 स्थित एस.एफ.एस. कॉलोनी पधारे थे।













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