नई दिल्ली : नागरिकता से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट के 28 फैसलों को रद्द कर दिया है। इन फैसलों में विदेशी न्यायाधिकरणों (Foreigners Tribunals) द्वारा दिए गए आदेशों को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने पर जोर देते हुए संबंधित मामलों की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने जैसा गंभीर फैसला उचित कानूनी प्रक्रिया और सभी पक्षों को सुनने के बाद ही लिया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकता का निर्धारण संवेदनशील विषय है और इसमें न्याय के मूल सिद्धांतों का पालन जरूरी है।
मामला असम से जुड़े नागरिकता विवादों से संबंधित था, जहां कुछ लोगों को विदेशी घोषित किए जाने के आदेशों को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द करते हुए मामलों को फिर से सुनवाई के लिए संबंधित विदेशी न्यायाधिकरणों के पास भेज दिया है।
अदालत ने कहा कि नागरिकता तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है। किसी भी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को अवैध प्रवासियों की पहचान करने का अधिकार है, लेकिन यह कार्य कानून के दायरे में रहकर और उचित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
फैसले के बाद असम में नागरिकता से जुड़े मामलों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब संबंधित मामलों में दोबारा सुनवाई होगी और प्रभावित लोगों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा।













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