भारत के नए संसद भवन का उद्घाटन 28 मई को होने जा रहा है। राजनीतिक कारणों के अलावा यह त्रिकोणीय इमारत अपनी खास डिजाइन के चलते भी चर्चा में है। खबर है कि नए संसद भवन के आर्किटेक्ट बिमल पटेल हैं, जो सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के चलते वह विपक्ष के निशाने पर भी रहे हैं। सियासी गलियारों में उन्हें एक वर्ग ‘मोदी का आर्किटेक्ट’ भी कहता है। इसके अलावा भी वह कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रहे हैं।
गुजरात के अहमदाबाद की कंपनी एचसीपी के निदेशक पटेल ने साल 1984 में शहर के सीईपीटी से आर्किटेक्चर में डिप्लोमा हासिल किया था। वेबसाइट के अनुसार, वह चेयरमैन और एमडी के तौर पर भी कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं। शुरुआती शिक्षा के बाद उन्होंने साल 1988 में मास्टर्स इन सिटी प्लानिंग की डिग्री साल की। 1995 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से उन्हें सिटी एंड रीजनल प्लानिंग में पीएचडी से नवाजा गया।
1996 में उन्होंने एनवायरमेंटल प्लानिंक कॉलेबोरेटिव यानी EPC की स्थापना की। साल 2012 से ही वह अध्यक्ष के तौर पर CEPT में भी सेवाएं दे रहे हैं। साल 2019 में उन्हें पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।
इन प्रोजेक्ट्स का भी रहे हिस्सा
नई दिल्ली में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के अलावा, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, पुरी में जगन्नाथ मंदिर की मास्टर प्लानिंग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में मुख्य आर्किटेक्ट के तौर पर शामिल रह चुके हैं। साथ ही उन्होंने गुजरात में भी कई बड़े शहरी कार्यों को भी अंजाम दिया है। पटेल और उनकी कंपनी हैदराबाद की अगा खान एकेडमी, मुंबई की अमूल डेयरी, चेन्नई का कंटेनर टर्मिनल, आईआईटी जोधपुर की डिजाइन तैयार कर चुकी है।
साल 1995 में पटेल के पास सीजी रोड का काम आया। कहा जाता है कि साबरमती रिवरफ्रंट के काम से खुश होकर पटेल को कांकरिया लेक का जिम्मा भी सौंपा गया। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यालय संभालने के बाद उन्हें काशी विश्वनाथ धाम तैयार करने की जिम्मेदारी मिली। खास बात है कि पास अहमदाबाद के गांधी आश्रम के पुनर्विकास का काम भी था, जो सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय की देखरेख में हो रहा था।













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