लंदन: मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (एमक्यूएम) के संस्थापक और नेता अल्ताफ हुसैन ने रविवार को पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (पीओके) में नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग को तुरंत रोकने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता और भविष्य पर पड़ सकता है।
सोशल मीडिया मंच टिकटॉक के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि कश्मीर में जारी बल प्रयोग को तत्काल बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान इस नीति को जारी रखता है, तो इसके गंभीर परिणाम देश के लिए हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “कश्मीर में बल प्रयोग तुरंत बंद होना चाहिए। यदि पाकिस्तान कश्मीर में सैन्य कार्रवाई और दमन जारी रखता है, तो इससे पाकिस्तान का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।”
अपने बयान में हुसैन ने दावा किया कि उन्हें रावलपिंडी और पीओके के अन्य क्षेत्रों से लोगों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़ी घटनाओं की जानकारी दी है। उन्होंने इन कथित घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए कश्मीर के लोगों के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
अल्ताफ हुसैन ने कहा कि इस क्षेत्र के लोग पिछले कई दशकों से अन्याय झेल रहे हैं और उनका भविष्य कश्मीरियों द्वारा स्वयं तय किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके अनुसार आज़ाद जम्मू-कश्मीर संवैधानिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, और इस क्षेत्र पर इस्लामाबाद का प्रशासनिक नियंत्रण अलग संवैधानिक स्थिति के बावजूद बना हुआ है।
उन्होंने कहा, “यह एक मान्यता प्राप्त तथ्य है कि कानूनी और संवैधानिक रूप से आज़ाद कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है।”
हुसैन ने आरोप लगाया कि पीओके के लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि रेंजर, फ्रंटियर कॉर्प्स और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती कर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं, कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध लगाए गए हैं और लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है।
अल्ताफ हुसैन ने इस कथित कार्रवाई को “अत्याचार” बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और तुरंत रोक लगाने की मांग की।
उन्होंने कहा, “मैं और मेरी पार्टी कश्मीरियों पर हो रहे दमन की कड़ी निंदा करते हैं और उनकी सभी जायज़ मांगों का समर्थन करते हैं।”
उन्होंने पाकिस्तान की अन्य क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसी तरह की नीतियों के कारण बलूचिस्तान और जनजातीय इलाकों में असंतोष बढ़ा है तथा सैन्य अभियानों और ड्रोन हमलों के कारण लोग विस्थापित हुए हैं।
पाकिस्तान के नेतृत्व से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि देश में दमन की नीति को छोड़कर संवाद और समाधान का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर के कई हिस्सों में आर्थिक समस्याओं, महंगाई, बिजली बिलों में वृद्धि, शासन व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई हैं, जिनमें हताहतों की भी सूचना है।













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