“मेरा बच्चा इन दिनों हर बात छिपाने लगा है, मुझसे सारी बातें झूठ बताता है।” अगर आपके दिमाग में भी इस तरह की बातें चल रही हैं। बच्चा आपसे दिन पर दिन झूठ बोलने लगा है। स्कूल की और दोस्तों की बातें आपसे छिपाने लगा है। तो जरूरत है बच्चे के साथ खुद पर गौर करने की। अक्सर बच्चे जब बड़े होने लगते हैं 7-8 साल के होने लगते हैं तो ज्यादा वक्त दोस्तों और स्कूल में एक्सप्लोर करते हैं। इस बीच माता-पिता को बच्चों के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत होती है। अगर पैरेंट्स बच्चों के साथ ऐसी हरकतें करते हैं जो बच्चे को नागवार गुजरे तो वो पैरेंट्स के साथ रूखा और झूठ बोलने वाला व्यवहार करने लगता है। बच्चा हर बात पर सच छिपाता है तो समझें कहीं आप इस तरह की गलतियां तो नहीं करते।
गलतियों पर ज्यादा ही डांटना
बच्चा जब छोटा होता है तो मासूमियत के साथ अपनी की गई गलती को आकर मां को या पापा को बता देता है। लेकिन माता पिता यहीं पर गलती करते हैं। उसकी सच्ची बातों को सुनने और समझने की बजाय गलती पर डांटना शुरू कर देते है। चीखने-चिल्लाने लगते हैं पनिश्मेंट देते हैं।बच्चा जब कई बार इस तरह से पनिश्मेंट पाता है तो धीरे-धीरे अपनी गलतियों को छिपाने लगता है और यहीं से झूठ बोलना स्टार्ट कर देता है।
जरूरत से ज्यादा उम्मीदें
स्कूल में टेस्ट हुआ बच्चे के नंबर कम आए, स्कूल में ओरल क्वेश्चन आंसर राउंड में बच्चे ने आंसर नहीं दिया। बच्चा जब ये छोटे फेलियर घर आकर पैरेंट्स को बताता है तो अक्सर बच्चे को समझाने और मोटिवेट करने की बजाय उसे ना पढ़ने या ना याद रहने पर डांटना शुरू कर देते हैं। माता-पिता की इस अनरियलिस्टिक सी एक्सपेक्टेशन ही बच्चों को झूठ बोलने के लिए मोटिवेट करती है। बच्चा अपने फेलियर को छिपाता है और झूठ बोलता है। जिससे वो पैरेंट्स की डांट से बच जाए।
हर गलती पर पनिश करना
बच्चे की हर छोटी-बड़ी गलती पर उसे सजा देना बच्चे को जल्दी ही ईमानदारी और सच बोलने से दूर ले जाती है। बच्चा अब झूठ बोलकर खुद को पनिश्मेंट से बचाने की कोशिश करता है।
पैरेंट्स का बिहेवियर
बच्चे मां-बाप से ही सीखते हैं। अगर पति-पत्नी आपस में किसी बात को छिपाते हैं या झूठ बोलते हैं। तो बच्चा इन चीजों को ऑब्जर्व करता है और खुद पर लागू करता है। बच्चे आसानी से झूठ बोलना शुरू कर देते हैं।













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