हर पेरेंट्स का सपना होता है कि वो अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी परवरिश दें, जिससे उनका बच्चा बड़ा हो कर काबिल और नेक इंसान बनें। लेकिन कई बार अच्छी परवरिश देने और बच्चों को सफल इंसान बनाने के चक्कर में पेरेंट्स कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी वो अपने बच्चों को मेंटली टॉर्चर कर बैठते हैं। ये चीजें शायद उस वक्त आपको भले ही नॉर्मल लगती हों लेकिन इन बातों का बच्चों के दिमाग पर इतना गहरा असर होता है कि वो इनसे कई बार उबर भी नहीं पाते। ये ना सिर्फ आपके और उनके रिश्ते को खराब करती हैं बल्कि बच्चे को ऐसे लाइफटाइम ट्रॉमा दे कर चली जाती हैं कि कहीं ना कहीं इससे बच्चे के भविष्य पर भी नेगेटिव असर पड़ता है। चलिए जानते हैं पैरेंट्स की कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में जो बच्चों को बुली करने का काम करती हैं।
कई पेरेंट्स की यह आदत होती है कि वो किसी बात की तह तक पहुंचे बिना ही हर गलती के लिए अपने ही बच्चे को जिम्मेदार बता देते हैं। घर में कोई सामान टूट जाए या कोई चीज खराब हो जाए तो बिना सच्चाई जाने झट से बच्चे को ही उसका जिम्मेदार ठहरा देते हैं। पेरेंट्स की यह आदत बच्चों को मेंटली बहुत हर्ट करती है। बच्चे की गलती ना होने पर भी जब पेरेंट्स उन्हें कसूरवार ठहरा देते हैं, तो धीरे-धीरे बच्चे का अपने पेरेंट्स से विश्वास उठने लगता है।
बच्चे तो शरारती होते ही हैं और कभी-कभी झूठ भी बोल देते हैं। लेकिन पेरेंट्स को कभी भी बच्चों की किसी बात पर अविश्वास नहीं व्यक्त करना चाहिए। जो पेरेंट्स बार-बार बच्चों की बात पर शक करते हैं या बच्चों से बोलते हैं कि तुम झूठ बोल रहे हो, मुझे तुम पर विश्वास नहीं; इस तरह की बातें भी बच्चे को मेंटली ट्रॉमा देती हैं। धीरे-धीरे उसे ऐसा लगने लगता है कि उसके माता-पिता को उस पर यकीन ही नहीं है और ना चाहते हुए भी बच्चा धीरे धीरे अपने पेरेंट्स से दूरी बनाने लगता है।
बच्चे को किसी ना किसी बात पर धमकी देने की आदत लगभग हर पेरेंट्स की होती है। कभी पढ़ाई ना करने पर पापा से शिकायत करने की धमकी, तो कभी काम ना सुनने पर फेवरेट खिलौना ना दिलाने की धमकी। इस तरह की बातें हर घर में देखने-सुनने को मिल जाती है। लेकिन बात-बात पर बच्चे को धमकी देना कतई ठीक नहीं। ऐसा कर के आप ना चाहते हुए भी अपने बच्चे को बुली करते हैं और कई वो इतना परेशान हो जाते हैं कि आपसे बातें छिपाने लगते हैं।
कई पेरेंट्स बच्चों को चिढ़ाने के लिए या मजाक में कुछ ऐसा बोल जाते हैं, जो बच्चों पर नेगेटिव असर डाल जाता है। जबकि पेरेंट्स को कभी भी अपने बच्चे को मजाक में या गुस्से में कुछ भी नेगेटिव नहीं बोलना चाहिए। गलती करने पर आप उसे डांट सकते हैं लेकिन हमेशा उसके बारे में कोई नेगेटिव टिप्पणी करने से बचें वरना ना चाहते हुए भी आप अपने बच्चों के दिल पर गहरी चोट दे बैठेंगे।
कई बार पेरेंट्स बच्चों से अपनी बात मनवाने के लिए उन्हें इमोशनली ब्लैकमेल करते हैं। अब उस पल में तो बच्चा आपकी बात मान लेगा लेकिन बार-बार इमोशनली ब्लैकमेल करने से, धीरे-धीरे बच्चा इरिटेट होने लगता है और आगे चलकर उसके नेचर पर इसका नेगेटिव इंपैक्ट पड़ता है। इसलिए पेरेंट्स को कभी भी बच्चे को इमोशनली ब्लैकमेल नहीं करना चाहिए।