डेस्क:चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) समेत अपनी अन्य प्रमुख मांगों को लेकर श्रमिक संगठन बुधवार को देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। दावा किया जा रहा है कि इसमें करीब 25 करोड़ कर्मचारी शामिल होंगे, जिससे बैंक, डाक, बीमा, परिवहन, उद्योग, कोयला खनन से लेकर निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कामकाज प्रभावित हो सकता है। उधर, सरकार की तरफ से कहा गया है कि बातचीत के लिए हमारे दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं। जिन मुद्दों व कानूनों को लेकर कर्मचारी संगठनों द्वारा विरोध किया जा रहा है, उन्हें राज्य सरकारों द्वारा पहले से लागू किया जा चुका है।
17 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, एनएमडीसी लिमिटेड, खनिज और इस्पात कंपनियों के कर्मचारी यूनियनों, बैंक व बीमा कंपनियों से जुड़ी यूनियन, राज्य सरकारों के विभागों व सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी संगठन हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि श्रमिक संगठनों ने भी हड़ताल का समर्थन दिया है।
10 केंद्रीय श्रमिक संगठनों और उनके सहयोगी संगठन मुख्य तौर पर हड़ताल में शामिल होंगे, जिसका मकसद केंद्र सरकार की मजदूर और किसान से जुड़ी नीतियों का विरोध करना है। संगठनों का कहना है कि उनके द्वारा लंबे समय के बाद कई मुद्दों को उठाया जा रहा है लेकिन कोई समाधान नहीं किया जा रहा है। न ही कहीं कोई सुनवाई हो रही है।
बिहार में राजद की छात्र शाखा के सदस्यों ने 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगियों के संयुक्त मंच द्वारा आहूत ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए जहानाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचकर प्रदर्शन किया।
सिलीगुड़ी में सरकारी बसों के चालक एहतियात के तौर पर हेलमेट पहन रहे हैं, क्योंकि 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है।
वामपंथी दलों के यूनियन ने जादवपुर में पैदल मार्च निकालकर ‘भारत बंद’ में भाग लिया। इस ‘बंद’ का आह्वान 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा किया गया, जिनका आरोप है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
भारत बंद के दौरान वामपंथी दलों के यूनियनों द्वारा आगजनी का प्रयास किया गया। हालांकि कोलकाता पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आग को बुझा दिया। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि केंद्र सरकार ऐसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रही है जो श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।
केंद्र सरकार की कथित श्रम-विरोधी नीतियों और आर्थिक सुधारों के खिलाफ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए ‘भारत बंद’ का आंशिक रूप से असर आज देशभर में देखा जा रहा है। कोलकाता के जादवपुर इलाके में 8B बस स्टैंड के पास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्राइवेट और सरकारी बस सेवाएं जादवपुर में चालू हैं, हालांकि बस ड्राइवरों ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखे हैं, जिससे बंद के दौरान संभावित हिंसा या पथराव से बचा जा सके। कोलकाता समेत विभिन्न राज्यों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। कोलकाता पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया है और हालात पर नजर रखी जा रही है।
ट्रेड यूनियन और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ-साथ अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी, स्व-रोजगार समूह जैसे स्व-रोजगार महिला संघ (SEWA) और ग्रामीण समुदाय भी आज के भारत बंद में भाग लेंगे। इस विरोध प्रदर्शन को संयुक्त किसान मोर्चा जैसे किसान मंचों का भी समर्थन प्राप्त होगा, जो अब निरस्त किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे आगे थे।
देशव्यापी हड़ताल में बिजली क्षेत्र के बड़ी संख्या में कर्मचारियों के भाग लेने के कारण 9 जुलाई को भारत की बिजली आपूर्ति में व्यवधान आ सकता है। भारत बंद में इस क्षेत्र के 27 लाख से अधिक कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है। यूनियन की ताकत और बिजली बोर्डों द्वारा की गई स्थानीय व्यवस्था के आधार पर, क्षेत्र के अनुसार प्रभाव की सीमा अलग-अलग हो सकती है।













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