नई दिल्ली :अमेरिका ने भारत को भारत-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए एक “केंद्रीय और अनिवार्य साझेदार” बताया है। अमेरिकी रक्षा विभाग में नीति मामलों के अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी ने कहा कि ऐसा क्षेत्र, जहां कोई एक शक्ति हावी न हो, दोनों देशों के हित में है और इस लक्ष्य को हासिल करने में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कोल्बी ने कहा कि अमेरिका-भारत सहयोग केवल साझा मुद्दों पर काम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारत को मजबूत बनाना भी है, ताकि क्षेत्र में संतुलित शक्ति व्यवस्था कायम रह सके। उन्होंने भारत को “महाद्वीपीय स्तर का गणराज्य” बताते हुए कहा कि भारत के निर्णय न केवल भारत-प्रशांत बल्कि वैश्विक परिदृश्य को भी प्रभावित करेंगे।
कोल्बी ने कहा कि भले ही दोनों देशों के इतिहास, भौगोलिक स्थितियां और दृष्टिकोण अलग-अलग हों, लेकिन एक मूलभूत समानता है—एशिया का भविष्य स्वतंत्र राष्ट्रों द्वारा तय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव हो रहा है और भारत-प्रशांत क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा का केंद्र बन चुका है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एशिया जैसे विशाल और विविध क्षेत्र में कोई एक देश स्थिर संतुलन नहीं बनाए रख सकता। इसके लिए समान हित रखने वाले देशों का सामूहिक योगदान आवश्यक है। कोल्बी के अनुसार, भारत की भौगोलिक स्थिति—विशेष रूप से हिंद महासागर में उसकी मौजूदगी—उसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।
कोल्बी ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, मजबूत सैन्य क्षमता और तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक साझेदार नहीं, बल्कि एक “आवश्यक साझेदार” के रूप में देखता है। उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की नीतियों की भी सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की सोच कई स्तरों पर मेल खाती है, खासकर राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के मामले में।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इससे रणनीतिक सहयोग पर कोई असर नहीं पड़ता। दोनों देशों के साझा हित—जैसे खुला व्यापार, राष्ट्रीय स्वायत्तता और संतुलित शक्ति संरचना—उनकी साझेदारी की मजबूत नींव हैं।
रक्षा सहयोग पर बोलते हुए कोल्बी ने बताया कि दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, सूचना साझा करने और तकनीकी सहयोग में तेजी आई है। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन और तकनीकी क्षेत्रों में सह-निर्माण और सह-विकास की अपार संभावनाएं हैं। भारत की स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने की महत्वाकांक्षा का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यह उसकी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाता है।
कोल्बी ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच रक्षा नीति समूह की बैठक जल्द ही आयोजित होगी, जिसमें दोनों देश आने वाले दशक के लिए सहयोग को और मजबूत करने की दिशा तय करेंगे। उन्होंने कहा कि सहयोग का लक्ष्य व्यावहारिक होना चाहिए—जैसे कि दोनों देशों की सेनाएं जरूरत पड़ने पर साथ काम कर सकें और भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सक्षम बने।
अंत में कोल्बी ने कहा कि वर्तमान समय भू-राजनीतिक बदलाव का दौर है, जो अक्सर संघर्ष का कारण बनता है। ऐसे में अमेरिका और भारत की जिम्मेदारी है कि वे अपने हितों की रक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखें। उन्होंने भरोसा जताया कि एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए, बल्कि अमेरिका के लिए भी लाभकारी होगा।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

