डेस्क : ईरान इस समय गंभीर तेल भंडारण संकट का सामना कर रहा है। कच्चे तेल के निर्यात में आई बाधाओं के कारण देश के पास तेल रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि ईरान को अब पुराने और जर्जर टैंकों में भी तेल संग्रह करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और समुद्री मार्गों में आई रुकावटों के चलते ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। निर्यात ठप होने से देश के भीतर तेल का स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे भंडारण क्षमता पर भारी दबाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में ईरान के पास सीमित दिनों के लिए ही भंडारण की सुविधा बची है। यदि जल्द ही निर्यात की स्थिति सामान्य नहीं होती, तो सरकार को मजबूरन तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, जो पहले से ही प्रतिबंधों के कारण दबाव में है।
स्थिति से निपटने के लिए ईरान अस्थायी उपाय अपना रहा है। बंद पड़े पुराने टैंक, अनुपयोगी संरचनाएं और जर्जर स्टोरेज सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है, ताकि अतिरिक्त तेल को कहीं सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, विशेषज्ञ इसे केवल अल्पकालिक समाधान मान रहे हैं।
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत
