लखनऊ। दलित वोट बैंक खिसकने से भाजपा चिंतित है। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने रविवार को पार्टी के राज्य मुख्यालय में भाजपा के दलित नेताओं संग मंथन किया। पूछा कि अनुसूचित वर्ग का वोट क्यों घटा? बारी-बारी से नेताओं ने कारण गिनाए। संविधान और आरक्षण के विपक्षी नेरेटिव के साथ ही पार्टी में लीडरशिप मांगी। कहा कि दलितों के लिए मोदी सरकार ने बहुत काम किया। योगी सरकार भी कर रही है, मगर फोटो फ्रेम में लगाने के लिए पार्टी के पास प्रदेश में कोई बड़ा दलित चेहरा नहीं है। बीएल संतोष ने कहा कि ठोस रणनीति के साथ आगे बढ़ें। अनुसूचित वर्ग के बीच जाएं। पैठ बढ़ाएं। उनके मुद्दे जानें।
भाजपा अनुसूचित मोर्चा संग की बैठक में दलितों को पार्टी से जोड़ने के लिए नये सिरे से जुटने पर मंथन हुआ। दलित नेताओं ने कहा कि मायावती और चंद्रशेखर दूसरे वर्गों के खिलाफ बोलकर भी लीडर बन गए, मगर हम तमाम सेवा कार्य करके भी नहीं बन पा रहे। इसके लिए उन्होंने सरकार और संगठन में हिस्सेदारी बढ़ाने और लीडरशिप विकसित करने की मांग रखी। कई लोगों ने अपनी जातियों की हिस्सेदारी को लेकर भी चर्चा की। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया ने कहा कि लोकसभा में धोबी समाज के किसी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि विपक्ष के झूठ की मजबूती से काट करनी होगी। वहीं अनुसूचित वर्ग से जुड़े विषयों पर गंभीरता से आगे बढ़ना होगा।
पार्टी नेताओं की बातें सुनने के बाद राष्ट्रीय महामंत्री संगठन ने कहा कि संगठन को मजबूती दें। दलित बस्तियों में संपर्क करें। विपक्ष ने जो झूठ फैलाया है, उसकी प्रभावी ढंग से काट करें। उन्हें समझाएं कि भाजपा दलितों की हितैषी है। संविधान में बदलाव की बात पूरी तरह गलत है। साथ ही दलित नेताओं से आपसी सहकार बढ़ाने पर जोर दिया। तीन दिन बाद कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य के आवास पर दलित नेताओं की बैठक और भोज होगा। यह क्रम आगे दूसरे नेताओं के यहां चलेगा।













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