नई दिल्ली : वैश्विक अनिश्चितता का असर अब देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की गतिविधियों पर साफ दिखने लगा है। इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि की गति धीमी पड़ गई है। अप्रैल 2026 में इस क्षेत्र में ऋण वृद्धि वर्ष-दर-वर्ष आधार पर घटकर 13 प्रतिशत रह गई, जबकि दिसंबर 2025 में यह 20 प्रतिशत थी। यह जानकारी आइआईएफएल कैपिटल की एक रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार द्वारा मई 2026 में आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना 5.0 शुरू की गई है। इस योजना के तहत मानक श्रेणी के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिए जाने वाले ऋण पर 100 प्रतिशत क्रेडिट गारंटी कवर उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक उधारकर्ता के लिए ऋण की अधिकतम सीमा 1 अरब रुपये तय की गई है।
आइआईएफएल कैपिटल का अनुमान है कि इस पहल से अतिरिक्त 2.55 लाख करोड़ रुपये तक का ऋण प्रवाह संभव हो सकता है, जो मौजूदा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ऋणों का लगभग 5 प्रतिशत है। अब तक मई के अंत तक लगभग 35,000 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले की इसी तरह की योजनाओं ने न केवल ऋण गतिविधियों को बढ़ावा दिया था, बल्कि धन के उपयोग में सुधार और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में भी कमी लाई थी। इसी आधार पर उम्मीद है कि आपातकालीन ऋण लाइन गारंटी योजना 5.0 भी मौजूदा दबाव को कुछ हद तक कम कर सकेगी।
उद्योग क्षेत्रों के अनुसार गिरावट अधिक स्पष्ट रूप से विनिर्माण और व्यापारिक गतिविधियों में देखी जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की हिस्सेदारी में भी पिछले दो वर्षों में लगभग तीन प्रतिशत अंक की कमी आई है। वर्तमान कैलेंडर वर्ष में अब तक ऋण वृद्धि की गति मूल्य और मात्रा दोनों स्तरों पर धीमी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल 2026 में पर नब्बे प्लस सूचकांक महीने-दर-महीने आधार पर 40 आधार अंक बढ़ा है, हालांकि इसे फिलहाल मौसमी प्रभाव माना जा रहा है।
छोटे और सूक्ष्म उधारकर्ताओं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, नकद ऋण और सावधि ऋण उत्पादों के साथ-साथ विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों में तनाव अपेक्षाकृत अधिक बढ़ा है।
दूसरी ओर, बड़े उधारकर्ताओं के समूह में स्थिरता और मजबूती देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार केवल 17 प्रतिशत उधारकर्ता कुल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ऋणों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, और इनकी ऋण अदायगी स्थिति छोटे एकल-ऋण उधारकर्ताओं की तुलना में बेहतर बनी हुई है। साथ ही, ऋणदाताओं का झुकाव भी उच्च गुणवत्ता वाले उधारकर्ताओं की ओर बढ़ा है, जिसके चलते कम जोखिम वाले उधारकर्ता वर्ग की हिस्सेदारी में पिछले दो वर्षों में चार प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है।













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