नई दिल्ली:रूसी सेना में भर्ती करीब 50 भारतीयों ने वापस लौटने के लिए भारतीय दूतावास से गुहार लगाई है। विदेश मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को यह जानकारी दी गई और कहा गया कि अपील पर भारत व रूस सकारात्मक कोशिश कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज नई दिल्ली में रेगुलर ब्रीफिंग की। इस दौरान सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘हम लगभग 50 भारतीय नागरिकों के बारे में जानते हैं जो वर्तमान में रूसी सशस्त्र बलों में अपना रोजगार समाप्त करना चाहते हैं। ये ऐसे मामले हैं जहां व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्यों ने अपनी शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने में सहायता के लिए हमसे संपर्क किया है।’
विदेश मंत्रालय प्रवक्ता ने कहा कि भारत की ओर से शीर्ष नेतृत्व स्तर सहित विभिन्न स्तरों पर इस मुद्दे को उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया रूस यात्रा के दौरान यह मामला उठाया था। रूसी पक्ष ने हमारी अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। दोनों पक्ष भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई के लिए काम कर रहे हैं। बता दें कि रूसी सेना में भर्ती हुए 10 भारतीय पहले ही देश लौट चुके हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि रूसी सेना में सेवारत भारतीयों की संख्या 100 तक हो सकती है।
वीडियो जारी कर मदद की गुहार
मालूम हो कि कुछ भारतीय तो मदद के लिए वीडियो अपील भी जारी कर चुके हैं, जिसमें कहा गया कि वे यूक्रेन के खिलाफ फ्रंट लाइन में लड़ रहे हैं। इनमें कई दूसरे देशों के लोग भी हैं। भारत के अलावा बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के नागरिकों को भी रूसी सेना में भर्ती किया गया है। पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग जिला निवासी उरगेन तमांग के परिवार वालों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को हाल ही में पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने तमांग को रूस से वापस लाने में हस्तक्षेप करने की अपील की। तमांग एजेंसी के जरिये नौकरी के लिए रूस गए थे। मगर, उन्हें जबरन रूसी सेना में शामिल कर लिया गया है और परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।













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