डेस्क : पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप सामने आए हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान सेना पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और परिणामों को प्रभावित करने के आरोप लगाए हैं।
यह क्षेत्र सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के लिहाज से भी इसका विशेष महत्व है। यहां 24 सामान्य सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिस पर पूरे क्षेत्र की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।
रिपोर्टों और आरोपों के अनुसार, पाकिस्तान सेना पर चुनाव पूर्व माहौल को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक दबाव, सुरक्षा तंत्र और स्थानीय संस्थाओं पर प्रभाव के जरिए कुछ राजनीतिक दलों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों में हथियारबंद तत्वों की मौजूदगी से चुनावी माहौल प्रभावित हो रहा है, और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा करने के नाम पर सैन्य नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
स्थानीय राजनीतिक नेताओं और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों ने स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष चुनाव क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं। साथ ही यह भी चिंता जताई गई है कि बार-बार राजनीतिक हस्तक्षेप से जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
गिलगित-बाल्टिस्तान लंबे समय से संवैधानिक स्थिति, शासन व्यवस्था और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर विवादों में रहा है। यहां चुनाव एक विशेष प्रशासनिक ढांचे के तहत कराए जाते हैं, जिसमें केंद्र सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव का परिणाम न केवल स्थानीय शासन को प्रभावित करेगा, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर डाल सकता है।













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