पाकुड़:देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 28 मई को चुनावी दौरे पर जिले के लिट्टीपाड़ा आएंगे। यहां वे विराजपुर मैदान में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। जानकारों की मानें तो अगर 28 मई को प्रधानमंत्री लिट्टीपाड़ा पहुंचते हैं, तो यह पहला मौका होगा जब देश के कोई प्रधानमंत्री पाकुड़ जिले में अपनी कदम रखेंगे। प्रबुद्ध लोगों की मानें तो आज तक देश के किसी भी प्रधानमंत्री का कदम पाकुड़ जिले की धरती पर नहीं पड़ा है। प्रधानमंत्री के आगमन कार्यक्रम को लेकर केवल भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं आम जनमानस में भी उत्साह है। राजनीतिक जानकार प्रधानमंत्री के इस चुनावी जनसभा को भाजपा के नजरिये से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। लोगों का मानना है कि यहां चुनावी सभा के माध्यम से प्रधानमंत्री राजमहल लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ गोड्डा व दुमका लोकसभा क्षेत्र को साधने का काम करेंगे।
जिले का लिट्टीपाड़ा एक ऐसा जगह है जो राजमहल, दुमका व गोड्डा तीनों लोकसभा क्षेत्र का केंद्र बिंदू माना जा सकता है। जानकारी के मुताबिक दुमका जिले का गोपीकांदर का कुछ हिस्सा तथा गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी व बोआरीजोर प्रखंड का कुछ हिस्सा राजमहल लोकसभा क्षेत्र में आता है। लिट्टीपाड़ा से दुमका व गोड्डा जिला काफी नजदीक भी है। ऐसे में राजनीतिक जानकार यह कयास लगा रहे हैं कि तीनों लोकसभा का केंद्र बिंदू होने के कारण भाजपा ने प्रधानमंत्री का कार्यक्रम यहां आयोजित कराया है।
चूंकि राजमहल लोकसभा सीट पर 1957 से लेकर अब तक भाजपा को महज दो बार ही जीत मिली है। अंतिम बार भाजपा को यहां से 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी, जिसमें देवीधन बेसरा सांसद के रूप में निर्वाचित हो कर सदन पहुंचे थे। उसके बाद 2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव में झामुमो के विजय हांसदा लगातार दो बार निर्वाचित हो कर सदन पहुंचे हैं। अगर विधानसभा स्तर पर भी देखें तो राजमहल लोकसभा क्षेत्र में कुल छह विधानसभा हैं। जिसमें वर्तमान में सिर्फ एक विधानसभा राजमहल में भाजपा से निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। बाकी पांच पर महागठबंधन दलों के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।
इस बार राजमहल लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में है, इसके लिए एक जून को वोटिंग होनी है। ऐसे में वोटिंग से तीन दिन पहले लिट्टीपाड़ा में पीएम की चुनावी जनसभा को राजनीतिक जानकार भाजपा के लिए फायदेमंद बता रहे हैं। वहीं पीएम के आगमन की सूचना पर भाजपा कार्यकर्ता काफी उत्साहित हैं और सभा को सफल बनाने को लेकर तैयारी में जुटे हुए हैं। वहीं राजमहल विधायक अनंत ओझा, भाजपा जिला अध्यक्ष अमृत पांडे सहित अन्य नेताओं ने सभा स्थल
वर्ष 1957 से अब तक राजमहल सीट पर इन पार्टियों का रहा कब्जा
साल 1957- पाइका मुर्मू, कांग्रेस
साल 1962 – ईश्वर मरांडी, झारखंड पार्टी
साल 1967 – ईश्वर मरांडी, झारखंड पार्टी
साल 1971 – ईश्वर मरांडी. कांग्रेस
साल 1977 – एंथोनी मुर्मू, जनता पार्टी
साल 1980 – सेत हेम्ब्रम, कांग्रेस
साल 1984 – सेत हेम्ब्रम, कांग्रेस
साल 1989 – साइमन मरांडी, झामुमो
साल 1991 – साइमन मरांडी, झामुमो
साल 1996 – थॉमस हांसदा, कांग्रेस
साल 1998 – सोम मरांडी, भाजपा
साल 1999 – थॉमस हांसदा, कांग्रेस
साल 2004 – हेमलाल मुर्मू, झामुमो
साल 2009 – देवीधन बेसरा, भाजपा
साल 2014 – विजय हांसदा, झामुमो
साल 2019 – विजय हांसदा, झामुमो
राजमहल लोकसभा चुनाव परिणाम पर गौर करें तो चुनाव दर चुनाव भाजपा का वोटिंग प्रतिशत बढ़ा है, परंतु प्रतिद्वंद्वी से हार का अंतर भी बढ़ा है। जानकारी के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोटिंग प्रतिशत 35.54 रहा था, वहीं झामुमो को 39.88 फीसदी वोट मिले थे। इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 41337 मतों से हार मिली थी। वहीं बात करें 2019 के लोकसभा चुनाव की तो इस चुनाव में भाजपा को 39 फीसदी वोट मिले थे। वहीं झामुमो को 48.47 फीसदी मत प्राप्त हुए थे।
इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 99193 मतों से हार मिली थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतने बड़े अंतर को पाटना भाजपा के लिए चुनौती तो होगी, परंतु ऐन वक्त पर प्रधानमंत्री का दौरा भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। राजमहल सीट पर मौजूदा सांसद विजय हांसदा, झामुमो। लगातार दो बार जीते हैं, 2014 व 2019। विपक्षी प्रत्याशी ताला मरांडी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं।













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