डेस्क : कांग्रेस ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए गए साक्षात्कार को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी ने कहा कि यह वास्तविक इंटरव्यू नहीं था, बल्कि पहले से तैयार किया गया एक सोचा-समझा संवाद था। कांग्रेस का आरोप है कि यह एक हताशाजनक जनसंपर्क प्रयास था।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के मुद्दे पर घिरने के बाद प्रधानमंत्री सुर्खियां बटोरने की अपनी पुरानी रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आलोचनाओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
‘बजट पूरी तरह विफल’
रमेश ने आरोप लगाया कि इस वर्ष का केंद्रीय बजट पूरी तरह विफल रहा है और उसमें वैचारिक थकावट के संकेत स्पष्ट हैं। उनके अनुसार बाजारों ने बजट पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी और निवेशकों का भरोसा भी नहीं जगा। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष द्वारा बजट की कड़ी आलोचना के बाद प्रधानमंत्री का इंटरव्यू देना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
कांग्रेस नेता ने यह भी टिप्पणी की कि प्रधानमंत्री की शैली में दिए गए कुछ ‘वन लाइनर्स’ वास्तविक मुद्दों का समाधान प्रस्तुत नहीं करते।
‘प्रधानमंत्री झुके और थके’
रमेश ने आरोप लगाया कि किसान मुद्दों और अन्य नीतिगत फैसलों को लेकर सरकार आलोचना का सामना कर रही है और प्रधानमंत्री इन विषयों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री “झुके भी हैं और थके भी हैं।”
उधर, अपने साक्षात्कार में प्रधानमंत्री मोदी ने बजट का बचाव करते हुए कहा कि यह किसी मजबूरी में लिया गया ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ जैसा निर्णय नहीं, बल्कि तैयारी और प्रेरणा से उपजा एक सुनियोजित कदम है। उन्होंने कहा कि यह बजट भारत की विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार का कोई भी बजट महज औपचारिक लेखा-जोखा दस्तावेज नहीं होता, बल्कि व्यापक दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जाता है। उन्होंने लाल किले की प्राचीर से दिए गए अपने पूर्व वक्तव्य “यही समय है, सही समय है” का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार में “अब समय आ गया है” की भावना निरंतर रही है।













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