डेस्क : पूर्व आप नेता और कोचिंग शिक्षक अवध ओझा ने हाल ही में एक वीडियो इंटरव्यू में कहा कि देश में “भयंकर क्रांति और मारकाट” कभी भी हो सकती है। उनके अनुसार, बढ़ती महँगाई, युद्ध जैसी परिस्थितियाँ और रोजमर्रा की वस्तुओं की कमी देश में सामाजिक अशांति को जन्म दे सकती है।
ओझा ने कहा कि यह स्थिति उसी तरह हो सकती है जैसे इतिहास में फ्रांस और रूस में क्रांतियाँ आई थीं। उन्होंने दावा किया कि यदि जनता को बुनियादी आवश्यकताओं से वंचित होना पड़े, तो देश में व्यापक हिंसक संघर्ष उभर सकता है।
उन्होंने महँगाई और गैस जैसी बुनियादी चीज़ों की कमी को अशांति के संभावित कारणों के रूप में बताया और कहा कि भूखे और असंतुष्ट लोग समाज की व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं।
ओझा ने अपने बयान में व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में वह “चीन चले जाएंगे”, जबकि आम आदमी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कुछ प्रशंसा भी की।
विश्लेषक मानते हैं कि इस तरह के विवादित बयान राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर प्रभाव डाल सकते हैं, इसलिए नागरिकों को तथ्यों के आधार पर स्थिति को समझने की आवश्यकता है।













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