नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव तक केंद्रीय एजेंसियों को विपक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक लगाने की मांग की गई है। तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को निर्वाचन आयोग से अपील कि वो केंद्रीय एजेंसियों को चुनाव होने तक टीएमसी समेत भाजपा के अन्य प्रतिद्वंद्वी दलों के उम्मीदवारों, नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगाए। इसमें प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का जिक्र है। टीएमसी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल (डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेन, साकेत गोखले और सागरिका घोष) ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों के खिलाफ भाजपा की ओर से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए एक ज्ञापन सौंपा।
टीएमसी नेताओं ने निर्वाचन आयोग से लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। इसके लिए ईडी, सीबीआई, आईटी विभाग और एनआईए के निदेशकों को स्थानांतरित करने का भी आग्रह किया गया। तृणमूल नेताओं ने उन घटनाओं का हवाला दिया जहां केंद्रीय एजेंसियों ने उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की है। गोखले ने बैठक के बाद कहा, ‘कल हर एक विपक्षी दल सहमत था। विपक्षी गठबंधन इंडिया की रैली में एक प्रस्ताव पारित किया गया था कि केंद्रीय एजेंसियों की ओर से अभूतपूर्व और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। हमने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों में वृद्धि देखी है।’
महुआ मोइत्रा के कार्यालय पर CBI का छापा जिक्र
इस सूची में महुआ मोइत्रा के कार्यालय पर सीबीआई का छापा जिक्र किया गया है। चंद्रनाथ सिन्हा (पश्चिम बंगाल में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम व वस्त्र के प्रभारी मंत्र) के खिलाफ ईडी के समन, कोलकाता नगर निगम की पार्षद जुई बिस्वास के खिलाफ आयकर छापा और पश्चिम बंगाल में NIA की ओर से कई टीएमसी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का जिक्र है। वहीं, आयोग ने महिलाओं की गरिमा के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के लिए सोमवार को बीजेपी के नेता दिलीप घोष और कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत को फटकार लगाई है। घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और श्रीनेत ने अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आयोग ने कहा कि दोनों नेताओं ने निम्न स्तर का व्यक्तिगत हमला किया और यह आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है।













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