डेस्क: वेनेज़ुएला “ग़ुलामों वाली शांति” नहीं चाहता, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने सोमवार को हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य तैनाती पिछले कई महीनों से उनके देश को “परीक्षण” के तौर पर परख रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैरेबियाई क्षेत्र में विशाल नौसेना मौजूदगी बढ़ाकर मादुरो पर दबाव तेज कर दिया है। अमेरिकी युद्धक जहाज़ संदिग्ध ड्रग-तस्करी करने वाली नौकाओं पर हमले कर रहे हैं और एयरस्पेस को लेकर भी सख्त चेतावनियाँ दी जा रही हैं।
कराकस में आयोजित रैली में मादुरो ने कहा,
“हम शांति चाहते हैं, लेकिन संप्रभुता, समानता और आज़ादी वाली शांति! हमें ग़ुलामों की शांति नहीं चाहिए, न ही उपनिवेशों वाली शांति!”
इसी बीच ट्रंप वेनेज़ुएला पर चर्चा के लिए अपने शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों से मिलने वाले थे।
संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ़्ट कैरियर सहित कई युद्धपोत लैटिन अमेरिका भेज चुका है और मादुरो से जुड़े एक कथित ड्रग कार्टेल को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है।
सितंबर से अब तक कैरेबियन सागर और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में चलाए गए अभियानों में अमेरिका ने कई नौकाओं पर हमले किए हैं, जिनमें कम से कम 83 लोग मारे गए। अमेरिका ने अब तक कोई सबूत पेश नहीं किया है कि वे लोग ड्रग तस्कर थे।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लक्ष्य कोई भी हो, ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।
वॉशिंगटन का दावा है कि इस सैन्य तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में ड्रग-तस्करी को रोकना है, जबकि कराकस का आरोप है कि असली लक्ष्य शासन परिवर्तन है। इसी कारण मादुरो ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को और तेज कर दिया है।
मादुरो ने कहा,
“हमने 22 हफ्तों की ऐसी आक्रामकता झेली है जिसे मनोवैज्ञानिक आतंकवाद कहा जा सकता है। इन 22 हफ्तों में उन्होंने हमें परखा है। लेकिन वेनेज़ुएला की जनता ने मातृभूमि के प्रति अपना प्रेम साबित किया है।”
सप्ताहांत में ट्रंप ने चेतावनी दी कि वेनेज़ुएला का एयरस्पेस “बंद” माना जाए, जिससे संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।
ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने जनवरी में दोबारा पद संभालने के बाद पहली बार मादुरो से बात की है, लेकिन बातचीत का विवरण देने से इनकार कर दिया। मादुरो कई बार कह चुके हैं कि वे ट्रंप से आमने-सामने वार्ता के लिए तैयार हैं।
सोमवार को कराकस में सैकड़ों मादुरो समर्थकों ने अमेरिका की “धमकियों” के खिलाफ मार्च निकाला। यह देश पहले ही आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है।
68 वर्षीय समुदाय नेता नार्सिसो टोरेअलबा ने कहा,
“हम एक स्वतंत्र देश हैं। हम युद्ध नहीं चाहते, हम शांति चाहते हैं!”
54 वर्षीय सिरीलो काज़ोरला ने कहा,
“हम हर किसी से संवाद को तैयार हैं, लेकिन अपने देश की संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेंगे, न ही मातृभूमि को बेचेंगे।”













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