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मंगल पर ‘जेबरा रॉक’ की रहस्यमयी खोज, वैज्ञानिकों में उत्साह

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
February 24, 2026
in ओपिनियन, विदेश
Reading Time: 1 min read
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मंगल पर ‘जेबरा रॉक’ की रहस्यमयी खोज, वैज्ञानिकों में उत्साह

मंगल ग्रह एक बार फिर वैज्ञानिकों के लिए नई पहेली बनकर सामने आया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के परसेवरेंस रोवर ने लाल ग्रह से एक ऐसी तस्वीर भेजी है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। धूल भरी लाल-नारंगी सतह और चट्टानों के बीच एक काले-सफेद धारियों वाला अनोखा पत्थर दिखाई दिया है, जिसे इंटरनेट पर ‘जेबरा रॉक’ नाम दिया गया है।

क्या है ‘जेबरा रॉक’?

करीब 20 सेंटीमीटर चौड़ा यह पत्थर आकार में भले छोटा हो, लेकिन इसकी बनावट बेहद असामान्य है। नासा की टीम ने इसे आधिकारिक तौर पर ‘फ्रेया कैसल’ नाम दिया है। पत्थर पर बनी स्पष्ट काली और सफेद धारियां इसे आसपास की लाल-भूरी चट्टानों से बिल्कुल अलग बनाती हैं। मंगल की एकरंगी सतह पर यह चट्टान दूर से ही अलग चमकती नजर आती है।

कहां मिला यह पत्थर?

यह अनोखी चट्टान मंगल के Jezero Crater क्षेत्र में मिली है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अरबों वर्ष पहले यह इलाका एक विशाल झील हुआ करता था। वर्तमान में परसेवरेंस रोवर क्रेटर की ऊंची ढलानों पर चढ़ाई कर रहा है और इसी दौरान उसे यह पत्थर जमीन पर अलग से पड़ा मिला।

विशेषज्ञों का कहना है कि मंगल पर इससे पहले इस प्रकार की धारियों वाला पत्थर नहीं देखा गया। हालांकि इसकी विस्तृत रासायनिक जांच अभी बाकी है, फिर भी इसके निर्माण को लेकर दो प्रमुख संभावनाएं सामने आ रही हैं।

संभावित वैज्ञानिक कारण

आग्नेय प्रक्रिया: जब ज्वालामुखी से निकला मैग्मा जमीन के भीतर धीरे-धीरे ठंडा होता है, तो उसमें मौजूद विभिन्न खनिज अलग-अलग परतों में जम जाते हैं। इससे चट्टानों पर धारियां बन सकती हैं।

कायांतरण प्रक्रिया: अत्यधिक ताप और दबाव के कारण चट्टानों की संरचना बदल जाती है। पृथ्वी पर भी ऐसे कायांतरित पत्थरों में जेबरा जैसी धारियां देखी गई हैं।

वैज्ञानिकों की उत्सुकता क्यों बढ़ी?

इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पत्थर आसपास की सतह से मेल नहीं खाता। यह किसी स्थानीय चट्टान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक ढीला टुकड़ा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह पत्थर ऊंची पहाड़ियों से लुढ़ककर नीचे आया होगा।

परसेवरेंस रोवर जैसे-जैसे ऊंचाई की ओर बढ़ रहा है, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि उसे इस ‘जेबरा रॉक’ के मूल स्रोत का पता चल सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह खोज मंगल के प्राचीन भूगर्भीय इतिहास और वहां की ज्वालामुखीय गतिविधियों के बारे में अहम सुराग दे सकती है।

छोटा सा दिखने वाला यह पत्थर लाल ग्रह के अतीत के बड़े रहस्यों से पर्दा उठाने की क्षमता रखता है। वैज्ञानिकों को भरोसा है कि आने वाले दिनों में यह खोज मंगल के विकासक्रम को समझने में नई दिशा दे सकती है।

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