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मुगलिया सल्तनत को नाकों चने चबवाने वाले  वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज

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Home ओपिनियन

मुगलिया सल्तनत को नाकों चने चबवाने वाले वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
April 3, 2022
in ओपिनियन
Reading Time: 1 min read
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मुगलिया सल्तनत को नाकों चने चबवाने वाले  वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज

छत्रपति शिवाजी महाराज की आज पुण्यतिथि है। इस मौके पर तमाम लोगों ने उन्हें नमन किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके कहा कि महान मराठा साम्राज्य के संस्थापक, वीर योद्धा राजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्यतिथि पर उन्हे कोटि-कोटि नमन। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट किया, “महान सेनानायक, कुशल प्रशासक और मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन और विनम्र श्रद्धांजलि।”

शिवाजी महाराज आधुनिक भारत के पहले स्वतंत्रता सेनानी माने जाते हैं। वह राष्ट्रवादी सोच के प्रवर्तक रहे। शिवाजी एक साहसी योद्धा होने के साथ ही अतिकुशल रणनीतिकार भी थे। उनके राज्याभिषेक को रोकने के लिए कई तरह की साजिशें की गईं, लेकिन उन्होंने सभी बाधाओं को पार करके हिंदू राज्य की स्थापना की।

1674 में छत्रपति की उपाधि हासिल हुई
शिवाजी को मुगलों के साथ ही मराठाओं से भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बीजापुर की आदिलशाही, अहमदनगर की निजामशाही और औरंगजेब की मुगलिया सल्तनत की शक्तिशाली विशाल सेनाओं को उन्होंने कई बार नाकों चने चबवाए थे। उन्हें 1674 में छत्रपति की उपाधि हासिल हुई थी।

खानदेश, बीजापुरी पोंडा समेत इन इलाकों पर किया कब्जा
छत्रपति की उपाधि हासिल करने के बाद शिवाजी महाराज ने खानदेश, बीजापुरी पोंडा, करवर, कोल्हापुर को अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद उन्होंने दक्षिण के राजाओं को विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ एकजुच होने की अपील की। 1677 में कर्नाटक पर धावा बोलकर वैलूर और जिंगी किले हासिल कर लिए। वे अपने सौतेले भाई वेंकोजी से सुलह करना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बनी। लड़ाई के बाद उन्होंने मैसूर का बहुत सारा इलाका अपने कब्जे में कर लिया।

3 अप्रैल 1680 को 50 साल की उम्र में निधन
शिवाजी महाराज की मृत्य 3 अप्रैल 1680 को हुई थी, उस समय वह 50 साल के थे। उनकी मौत के कारण को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ का कहना है कि उनकी स्वाभाविक मृत्यु हुई थी, जबकि कई किताबों में लिखा गया है कि उन्हें साजिश के तहत जहर देकर मारा गया था। कहा जाता है कि जहर की वजह से उन्हें खून की पेचिस होने लगी थी, जिसे ठीक नहीं किया जा सका। दावा यह भी किया जाता है कि शिवाजी तीन साल से बीमार चल रहे थे।

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