देश के अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार ने बिन्देश्वरी प्रसाद मण्डल की रिपोर्ट को लागू करते हुए किया था। मण्डल कमीशन की रिपोर्ट में विभिन्न धर्मों जिनमें मुसलमान भी शामिल थे और पंथों की 3743 जातियों यानी की देश की 52 प्रतिशत आबादी को सामाजिक, शैक्षिक व आर्थिक मापदण्डों के आधार सामाजिक व शैक्षिक पिछड़ापन के आधार पर आरक्षण घोषित किया गया था। उसके बाद बनी ओबीसी की श्रेणियों की श्रेणी एक और श्रेणी दो (ए) में पिछड़े मुसलमानों को इस ओबीसी आरक्षण का लाभ देने का उल्लेख किया गया।
हालांकि इससे पहले 1932 से तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने दलित मुसलमानों, सिख, बौद्ध व ईसाई समाज को आरक्षण का लाभ दिये जाने का प्रावधान किया था। मगर 10 अगस्त वर्ष 1950 को जब आजाद भारत का संविधान लागू हुआ तो मुसलमानों को इस आरक्षण का लाभ देने से इस तर्क के आधार पर इनकार कर दिया गया कि धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। यह लड़ाई आज भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।
मगर मण्डल आयोग की रिपोर्ट में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण में सामाजिक व आर्थिक आधार पर पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण का लाभ दिये जाने का प्रावधान किया गया। मगर आठ लाख रुपये की सालाना आमदनी वाले पिछड़े मुसलमानों को इस दायरे से बाहर रखा गया। मुस्लिम समुदाय के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण में शामिल करने की प्रक्रिया और स्थिति समय-समय पर बदलती रहती है। यहां पर अब तक की स्थिति को संक्षेप में प्रस्तुत किया जा रहा है:-
-केंद्र सरकार ने ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों को शामिल किया है। ये वर्ग अशरफ यानि उच्च वर्ग शेख, सैय्यद, मुगल, पठान, अजलाफ मध्यवर्गीय और अरजाल निम्न श्रेणियों में विभाजित होते हैं। अशरफ (उच्च वर्ग) को आमतौर पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलता, जबकि अजलाफ (मध्य वर्गीय पिछड़े) और अरजाल (अत्यंत पिछड़े) को लाभ मिलता है।
-कई राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों को ओबीसी आरक्षण में शामिल किया है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु, और पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय के कई वर्गों को ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है।
-समय-समय पर विभिन्न कमीशन और समितियां इस विषय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं। मंडल कमीशन और सच्चर कमीशन ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन को स्वीकारा और आरक्षण की सिफारिश की थी।













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