डेस्क : पश्चिम बंगाल सरकार ने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) आरक्षण नीति में बड़ा बदलाव करते हुए नई सूची को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद अब राज्य में केवल 66 जातियों को ही ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा, जबकि 77 मुस्लिम समुदायों को इस सूची से बाहर कर दिया गया है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, यह कदम सामाजिक-आर्थिक स्थिति के पुनर्मूल्यांकन और आरक्षण प्रणाली को अधिक “पारदर्शी और तर्कसंगत” बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। नई सूची के लागू होने के साथ ही पिछली ओबीसी श्रेणी संरचना में व्यापक बदलाव हो गया है।
इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि यह कदम सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है और कुछ समुदायों के अधिकारों पर असर डाल सकता है। वहीं, सत्ताधारी दल का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है और इसका उद्देश्य आरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नई ओबीसी सूची का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि किसी भी लाभार्थी को अचानक असुविधा न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस बदलाव के बाद राज्य की आरक्षण राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है, जो आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।













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